ब्रह्मज्ञान: माँगने से नहीं, पात्रता और आंतरिक प्यास से प्राप्त होता है
“जिस दिन मनुष्य के भीतर सत्य को जानने की वास्तविक भूख जाग जाती है, उसी दिन से ब्रह्मज्ञान की यात्रा प्रारम्भ हो जाती है।” मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि धन, पद, प्रतिष्ठा या सांसारिक […]








