यूरोप यात्रा के दौरान आयरलैंड संसद, ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और लेस्टर में आयोजित हुए हिमालयीन समर्पण ध्यानयोग शिविर, सांसदों और विद्यार्थियों ने लिया आध्यात्मिक अनुभव।
भारतीय योग और ध्यान की परंपरा का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इसी क्रम में सद्गुरु शिवकृपानंद स्वामीजी के सान्निध्य में आयरलैंड की संसद में सांसदों के लिए ‘हिमालयीन समर्पण ध्यानयोग’ शिविर आयोजित किया गया। शिविर में सांसदों ने ध्यान का अभ्यास किया, आध्यात्मिक अनुभूतियों को साझा किया और ध्यान से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।

यह पहली बार नहीं है जब किसी संसद में स्वामीजी का ध्यान शिविर आयोजित हुआ हो। इससे पहले भारत, यूके, जर्मनी, श्रीलंका और नेपाल की संसदों में भी वे सांसदों को ध्यान का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
यूरोप यात्रा के दौरान स्वामीजी ने ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी, लेस्टर तथा आयरलैंड के विभिन्न शहरों में भी ध्यान और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा पर व्याख्यान दिए। ऑक्सफर्ड में विद्यार्थियों ने ध्यान, आभामंडल (ऑरा) और आध्यात्मिक अनुभूतियों पर विस्तृत चर्चा की।
लेस्टर में आयोजित तीन दिवसीय शिविर में धरती को माता मानकर प्रार्थना के माध्यम से मानसिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराया गया। वहीं डबलिन में सेंट पैट्रिक कैथेड्रल के डीन विलियम मॉर्टन से उनकी आध्यात्मिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
स्वामीजी ने कहा कि विश्वभर में योग दिवस तो मनाया जाता है, लेकिन योग को केवल योगासन तक सीमित समझना उचित नहीं है। योग का वास्तविक स्वरूप अष्टांग योग है, जिसका अंतिम उद्देश्य ध्यान के माध्यम से बंधनों और आसक्तियों से मुक्ति प्राप्त करना है।
वर्तमान में सद्गुरु श्री शिवकृपानंद स्वामीजी की यूरोप यात्रा जारी है और विभिन्न देशों में आगे भी कई ध्यान शिविर प्रस्तावित हैं।


