अखाड़ों पर साध्वी कंचन गिरि का बड़ा हमला: ब्रह्मचर्य के नाम पर पाखंड, महिलाओं का शोषण और भ्रष्टाचार, कई संतों व आचार्य महामंडलेश्वर पर लगाए गंभीर आरोप

एक अखाड़े के आचार्य को बताया सबसे बड़ा पाखंडी

हरिद्वार। अखाड़ों और संत समाज को लेकर अपने बेबाक बयानों के कारण चर्चा में रहने वाली साध्वी दुर्गा आचार्य भवानी उर्फ कंचन गिरि ने एक बार फिर सनातन परंपरा के प्रमुख अखाड़ों और कुछ आचार्य महामंडलेश्वरों पर गंभीर आरोप लगाकर नई बहस छेड़ दी है। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए उन्होंने अखाड़ों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, पाखंड, ब्रह्मचर्य के नाम पर दोहरे मापदंड और महिलाओं की भूमिका को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।


साध्वी कंचन गिरि ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि जिन लोगों ने सन्यास धारण कर समाज को त्याग, तपस्या और आध्यात्मिकता का संदेश देना था, आज वही लोग भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-संपत्ति के पीछे भाग रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिणा लेने के बाद सबसे पहले लिफाफे का वजन देखा जाता है और उसी के आधार पर सम्मान और व्यवहार तय होता है। उनके अनुसार आज सबसे अधिक भ्रष्टाचार अखाड़ों के भीतर व्याप्त है।


उन्होंने एक आचार्य महामंडलेश्वर को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह स्वयं को ब्रह्मचारी और सदाचारी बताते हैं, लेकिन उनके जीवन की वास्तविकता कुछ और ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग तीन-तीन महिलाओं के साथ रहते हैं, फिर भी स्वयं को ब्रह्मचारी कहलवाते हैं, जबकि किसी अन्य व्यक्ति के निजी जीवन पर सवाल उठाकर उसे दुराचारी घोषित कर देते हैं।


साध्वी ने आरोप लगाया कि एक प्रमुख आचार्य स्वयं को बड़ा ज्ञानी बताते हैं, जबकि उनके पास वास्तविक शास्त्रीय ज्ञान नहीं है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्यों के पास जो आध्यात्मिक और दार्शनिक ज्ञान होता है, उसके सामने ऐसे लोग कुछ भी नहीं हैं। उनका आरोप था कि आज आचार्य ज्ञान और साधना से अधिक उद्योगपतियों, फिल्मी हस्तियों और बड़े नेताओं के संपर्क में रहने को प्राथमिकता देते हैं।


अपने वीडियो संदेश में उन्होंने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक आचार्य दो युवतियों को अपनी बेटी बताते हैं, लेकिन वही युवती उनके कमरे में रहती और सोती थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मासिक धर्म के दौरान भी उसे उसी कमरे में रखा जाता था। साध्वी ने सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में साधना और पूजा-पाठ की पवित्रता कैसे बनी रह सकती है।


उन्होंने समाज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आज लोगों की आस्था भीड़ और प्रचार पर आधारित हो गई है। जिन संतों के पास उद्योगपति, अभिनेता और राजनेता आते हैं, जनता भी उन्हीं के पीछे चल पड़ती है, जबकि सच्चे साधकों और तपस्वियों के पास कोई नहीं जाता।


साध्वी कंचन गिरि ने कहा कि अखाड़ों में महिलाओं की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई कथित ब्रह्मचारी संत महिलाओं से पैर दबवाते हैं और उन्हें अपने आश्रमों में रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह सब सन्यास की मर्यादा के विपरीत है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।


उन्होंने आरोप लगाया कि कई महंत और आचार्य महामंडलेश्वर परिवार सहित जीवन जी रहे हैं तथा उनके बच्चे भी हैं। ऐसे मामलों की सरकारी स्तर पर जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने बताया कि वह स्वयं इस विषय को लेकर न्यायालय पहुंच चुकी हैं और अदालत में अपना पक्ष रखेंगी।


कुंभ मेले का उल्लेख करते हुए साध्वी ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालु यह मानकर कुंभ में आते हैं कि पवित्र स्नान से पापों का नाश होगा, लेकिन यदि वहां पाखंड और अनैतिकता का वातावरण रहेगा तो लोगों की आस्था को ठेस पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र धारण कर यदि कोई व्यक्ति मर्यादाओं का उल्लंघन करता है तो वह समाज और सनातन दोनों के साथ अन्याय करता है। ऐसे पापियों के पास जाने से कोई पुण्य नहीं मिलने वाला।


उन्होंने पिछले कुंभ में एक अभिनेत्री को शाही स्नान के दौरान पालकी में बैठाकर ले जाने की घटना पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि यदि यही परंपरा जारी रही तो भविष्य में फिल्मी हस्तियों और सोशल मीडिया सेलिब्रिटीज़ को भी पालकी में बैठाकर शाही स्नान कराया जा सकता है। इस बार उर्फी जावेद, सनी लियोनी और राखी सावंत को पालकी में देखा जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।


अपने बयान के अंत में साध्वी कंचन गिरि ने कहा कि अखाड़ों और संत समाज की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सरकार निष्पक्ष जांच कराए और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या अनैतिक गतिविधियां सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

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