बैसाखी अपने आप में ही एक बड़ा उत्सव है। कथाएँ हैं कि अप्रैल माह में , हिंदू धर्म के अनुसार गंगा, धरती पर अवतरित हुई। गंगा जिसको सबसे निर्मल कहा जाता है। जिन्होंने भी सत् को पाया, सबने गंगा की बात की , जैसे संत कबीर कहते हैं — “कबीर मन निर्मल भयो जैसे गंगा नीर, आगे-पीछे हरि भगवान फिरै कहत कबीर कबीर”! क्योंकि गंगाजल सबसे पवित्र जल है। गंगा मानो कहीं मन को निर्मल करने का संदेश देने के लिए उतरी हो। इसलिए संतों ने गंगा की बात की, वो यमुना कह देते, पर यमुना रुक जाती है, मैली हो जाती है। मैल यानी विकार! बैसाखी “तेरा, तेरा, तेरा” भाव के लिए है। तेरा, तेरा, तेरा, तेरा, कुछ नहीं है मेरा। तो कहा तेरा, तेरा, तेरा, तेरा आ जाए ! मैं माँ, मैं बाप, मैं बेटा, मैं बेटी, मैं सेठ, मैं सेठानी, मैं ऑफिसर, मैं मिनिस्टर, तुम्हारी औकात नहीं है, ये तुम्हारी अकल में आ जाए तो आज की बैसाखी सफल, तेरा, तेरा, तेरा । तन तेरा, खोपड़ी तेरी, ऑफिसर तुम, मिनिस्टर तुम, सेठ तुम, स्टार तुम, माँ तुम, बाप तुम और जिस दिन ये खोपड़ी में आ गया तेरा, तेरा, तेरा ! तेरा अंदर मन निर्मल हो गया। जीसस इसे ईगो कहते हैं, हिंदू शास्त्र अहंकार कहते हैं, गुरु नानक देव होमै कहते हैं। ये होमै, ईगो, अहंकार, ये तुम्हारा मल-मूत्र है। वो प्रेम, प्रेम की कमाई, तुम्हारी श्रद्धा, तुम्हारी भक्ति जब किसी में आ जाती है वो तुम्हारे दिमाग के विकारों को साफ करता है। विकार गंद ही तो है। कामवासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार पाँचों गंद हैं। सिर्फ वो जिसको सत्य गुरु कहा वो तुम्हारे उन विकारों को साफ करता है। इसके लिए ये त्यौहार है। ये त्यौहार ऐसा नहीं है कि बैसाखी है चलो गंगा में डुबकी मार आते हैं। डुबकी मार आ पर अंदर के विकार को कौन साफ करेगा? कृष्ण भगवान ने अर्जुन के दिमाग के अंदर के विकार साफ किये, गुरु नानक देव ने गुरु अंगद ( लहणा ) के अंदर जो विकार थे उनकी सफाई की। राम परमहंस ने नरेंद्र नाथ की सफाई की जिससे वे विवेकानंद हुए, जीसस ने जॉन और मैथ्यू को साफ किया और जब उन्होंने सफाइयाँ की तो वो सारे ग्रंथ बन गए। जब अंदर की सफाई हो जाती है, तो “तेरा, तेरा, तेरा” का भाव उत्पन्न होता है – “तन, मन, धन तुझको अर्पण क्या लागे मेरा”।आज का बैसाखी का दिन सिख धर्म से भी जुड़ा हैI गुरु तेग बहादुर जी जो नौवें गुरु हुए उनकी आज शहादत हुई थी। दसवें गुरु साहिब ने खालसा पंथ की स्थापना की। खालसा पंथ यानी खालसा मतलब शुद्ध, शुद्ध आत्मा, निर्मल मन। अब ये अपनी फतेह नहीं कराएँगे , वाहेगुरु जी दी फतेह, जो भी है बस गुरु है क्योंकि उसने मेरे अंदर का मैल धो दिया, खालसा हो गए। आज जो गेहूँ की कटाई होगी, कटाई गेहूँ की नहीं तुम्हारे विकारों की होगी, तेरे अंदर फँसे हुए अहंकार की कटाई होगी। अगर आज तुम बैसाखी पर ये दृढ़ संकल्प ले लो, धारणा कर लो तेरा, तेरा, तेरा, मैं कुछ नहीं हूँ। तो आज का ये बैसाखी का दिन बड़ा प्यारा है। अगर बाहर की गंगा में आज खूब डुबकियाँ मारी और चलो जी बैसाखी हो गई, तो बेकार! सोचो कि अंदर की गंगा कहाँ से लाऊँ, कहाँ से लाऊँ वो गंगा जो अंदर की मेरी इस ‘मेरा’ को खत्म करके तेरा, तेरा, तेरा, तेरा कर दे। अंदर से खालस होने के लिए कि मैं अपने अहंकार के शीश को गुरु के चरणों में अर्पण कर दूँ। तो ये आज गहन चिंतन का दिन है। आज बैसाखी का दिन महान उत्सव तभी है जब सत्य के संग अंदर के फँसे विकारों की सफाई के लिए तुम पूरी तरह समर्पित हो जाओ। आज के इस बैसाखी के दिन ऐसा हमको धारण करना है, तेरा, तेरा, तेरा, तेरा और अंदर से खालस होकर, निर्मल होकर अपने परमधाम की यात्रा करनी है।
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सच्ची बैसाखी: जब मन हो निर्मल
