स्कूलों की मनमानी पर भड़का गुस्सा, महंगी किताबों के खेल पर उठे सवाल

एनसीईआरटी के नाम पर निजी पब्लिकेशन थोपने का आरोप
विनोद धीमान
हरिद्वार।
लक्सर क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी को लेकर आम जनता, अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। आरोप है कि कई निजी विद्यालय एनसीईआरटी का नाम लेकर केवल औपचारिकता निभाते हुए एक-दो किताबें ही शामिल करते हैं, जबकि अधिकांश पाठ्यक्रम महंगी निजी पब्लिकेशन की किताबों से भर दिया जाता है।
इस व्यवस्था के चलते अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है और शिक्षा व्यवस्था पर व्यवसायीकरण के आरोप लग रहे हैं।


सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्र सिंह आनंद ने इसे एक संगठित गोरखधंधा बताते हुए कहा कि इस खेल में प्रभावशाली लोगों और बड़े नामों की संलिप्तता के आरोप भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी इस मुद्दे को उठाया गया था, जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई की, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि लक्सर क्षेत्र के कई निजी स्कूल राजनीतिक और प्रभाव शाली लोगों से जुड़े हैं, जो जन सेवा के नाम पर अभिभावकों के साथ मनमानी कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की अनदेखी के चलते यह सिलसिला वर्षों से जारी है।


रविंद्र सिंह आनंद ने यह भी दावा किया कि पिछले करीब 10 वर्षों में प्रदेश में लगभग ढाई हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। उनके अनुसार, निजी स्कूलों पर राजनीतिक वर्चस्व और हर साल एडमिशन फीस के नाम पर हजारों रुपये वसूले जाना भी एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे आम लोगों के बच्चों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकल्प कमजोर होता जा रहा है।


ग्रामीण और किसान परिवारों पर इस बढ़ते आर्थिक बोझ को अन्यायपूर्ण बताते हुए उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जनहित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

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