काँवड़ यात्रा का क्या महत्व है?
पूछा है कि इस सावन के महीने में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं को हम काँवड़ लेकर आते देखते हैं। उनमें से कुछ तो पचास-पचास, साठ-साठ किलो जल अपने कंधों पर लेकर आते हैं और उस जल को शिवलिंग पर चढ़ाते हैं; इसका महत्व समझाएँ। आजकल हम देखते हैं कि जब साल में सावन का ये महीना आता है, तो इसमें कितने लोग हरिद्वार तक पैदल जाते हैं। और जैसे बताया, कोई वहाँ से साठ-साठ, सत्तर-सत्तर लीटर जल दोनों कंधों पर लेकर अपने निवास तक जाता है और फिर शिवलिंग पर जल चढ़ाता है। ये तो हमें मालूम ही है कि सावन भगवान शिव का महीना है।
भगवान शिव कौन है? काँवड़ यात्रा क्या है? यात्रा मतलब जर्नी। तो ये जर्नी कहाँ की है? काँवड़ किसके लिए जल ला रहे हैं? भगवान शिव के लिए। भगवान शिव कौन हैं? मृत्यु के देवता। समझो, इसका गहरा अर्थ है। काँवड़ यानी कंधे पर जल लेकर आना और शिवलिंग पर जल चढ़ाना। एक पुरानी कथा है कि समुद्र मंथन के समय जो ज़हर निकला, वो सब शिवजी ने अपने अंदर ले लिया। जो ज़हर उनके गले में ठहर गया, तो उसी ज़हर को हटाने के लिए देवताओं ने ब्रह्माण्ड से उनके सिर के ऊपर गंगाजल डाला, ताकि उस ज़हर का असर चला जाए।
हालाँकि भगवान शिव की जटाओं में गंगा हैं, पर कथा है कि उन पर जल चढ़ाया गया और आज तक शिवजी पर जल चढ़ाया जा रहा है। अगर हम देखें तो कोई भी उत्सव, कोई भी त्योहार या परमात्मा से जुड़ा कोई भी दिन या महीना तुम्हें परमात्मा से मिलाने के लिए है। याद रखना! हम कहेंगे कि आज राम नवमी है, आज जन्माष्टमी है, आज काँवड़ यात्रा चल रही है, सावन का महीना है; ये कोई मज़ाक नहीं है, ये कोई मनोरंजन नहीं है, ये कोई रोमांच नहीं है। हम कहें कि माता रानी की चढ़ाई चढ़ रहे हैं, हम अमरनाथ की यात्रा जा रहे हैं; तो ये कोई मनोरंजक या रोमांचक कार्य नहीं है। इसमें बहुत गहरा रहस्य है। वो गहरा रहस्य क्या है? जो समझ गया, उसने पा लिया।
क्या पा लिया? भगवान शिव को पा लिया, श्री राम को पा लिया, वैष्णो माँ को पा लिया, गुरु नानक देव को पा लिया, जीसस को पा लिया, अल्लाह को पा लिया। देखो, हर कोई परम से जुड़ा हुआ है, किसी न किसी धर्म से जुड़ा हुआ है और उस धर्म में अपनी-अपनी मान्यताएँ हैं।
अगर उस धर्म की बात को हम गहराई से समझ लें, तो मुक्ति हमारे दरवाज़े पर खड़ी है। मुक्ति किससे? मुक्ति क्या है? मरने वाले शरीर से मुक्ति, क्योंकि ये शरीर मरता है। तो मरने वाले शरीर से मुक्ति। आज जो शरीर तुम्हारे पास है, तुम एक दिन मरने वाले हो। तुम्हारे घर में जो बैठे हैं, वे भी मरने वाले हैं। जिसको तुम ‘मेरा खानदान’ कहते हो, वे सब भी मरने वाले हैं। हाँ या ना? तो जो मर जाता है, उस शरीर से मुक्ति, मरने वाले शरीर से मुक्ति। मोक्ष क्या है? मोक्ष वो स्थान है, जहाँ मुक्त हुई आत्माएँ उस अमर शरीर में पहुँच जाती हैं।
मोक्ष वो जगह है, जहाँ मुक्त आत्माएँ रहती हैं। ये मृत्युलोक कहाँ है? जहाँ मरने वाले दोबारा जन्म लेते हैं। यहाँ पेड़-पहाड़, कीड़े-मकोड़े, पंछी, जानवर और हम इंसान जन्म लेते हैं। मनुष्य देह में आकर तुम मुक्त हो सकते हो, जिसको जीसस ने ‘लिबरेशन’ कहा, श्री कृष्ण भगवान ने ‘स्थिति प्रज्ञा’ कहा, गौतम बुद्ध ने ‘निर्वाण’ कहा, महावीर ने इसे ‘कैवल्य’ कहा। तुम कोई भी नाम ले लो, शब्द तो तुम्हारे दिए हुए हैं, भाई! इसलिए जब भगवान शब्द आता है, तो उसमें बहुत गहरा रहस्य है।
काँवड़ यात्रा यानी किसकी यात्रा? काँवड़ की! “राम नाम सत् है, राम नाम सत् है” कहते हैं न, जब शव को कंधे पर रखते हैं और फिर लोग कंधा बदलते हैं। क्यों? क्योंकि अगर तुम कंधा देते समय समझ जाओ कि एक दिन कोई तुम्हें भी ऐसे ही कंधा देगा, तो तुम सत् को प्राप्त कर लोगे। आजकल तो एंबुलेंस में ले जाते हैं। आजकल कोई कंधे पर नहीं रखना चाहता। “राम नाम सत् है” कहते हुए कंधे पर किसको ले जाते हैं? मुर्दे शरीर को। मुर्दा शरीर क्या है? शव। शव कहाँ जा रहा है? श्मशान।
श्मशान किसका है? भगवान शिव का। इसलिए भगवान शिव को मृत्यु का देवता कहा है। इस शरीर को, जिसके बारे में तुम कहते हो कि मैं डॉक्टर हूँ, मैं यह हूँ, मैं वो हूँ; ये मरे हुए शरीर की पहचान है, शव की पहचान है। तुम मुर्दा शरीर हो, मुर्दा डॉक्टर हो, मुर्दा इंजीनियर हो, मुर्दा चार्टर्ड अकाउंटेंट हो, मुर्दा मंत्री हो, मुर्दा स्टार हो, मुर्दा अमीर आदमी हो। क्या तुम ऐसा समझते हो? नहीं! नहीं समझते, क्योंकि तुमने कभी समझा ही नहीं। तुमने भगवान को भी मनोरंजक और रोमांचक चीज़ों के साथ ही मिला लिया। परमात्मा मनोरंजन नहीं है।


