किसका होगा ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ नाम? रजिस्ट्रेशन के बाद गरमाया मामला

शुभकामना संदेश में एक शब्द ने मचा दी हलचल, अखाड़ा परिषद को लेकर बढ़ी चर्चा

महानिर्वाणी गुट की अखाड़ा परिषद के पंजीकरण की चर्चा के बाद संत समाज में नई बहस, आगे क्या होगा?

हरिद्वार। अखाड़ों की नगरी हरिद्वार में अखाड़ा परिषद को लेकर चल रही खींचतान अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। दो गुटों में बंटी अखाड़ा परिषद के बीच अब संस्था के नाम, पद और कानूनी पहचान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। खास तौर पर एक गुट की संस्था के पंजीकृत होने की चर्चा के बाद संत समाज और अखाड़ों के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, निर्वाणी गुट अखाड़ा परिषद के रजिस्ट्रेशन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इतना ही नहीं, संस्था के नाम को लेकर कॉपीराइट अथवा अन्य कानूनी संरक्षण लेने की संभावनाओं की भी चर्चा सामने आ रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

शुभकामना संदेश में ‘रजिस्टर्ड’ शब्द से मची हलचल
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब एक शुभकामना संदेश में ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ के साथ ‘रजिस्टर्ड’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। इसी शब्द ने संत समाज के बीच नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी एक गुट ने संस्था को विधिवत पंजीकृत करा लिया है और नाम को लेकर कानूनी संरक्षण भी हासिल कर लिया, तो भविष्य में दूसरे गुट द्वारा उसी नाम और पद का इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकेगा?

क्या एक ही नाम से दो परिषदें चल पाएंगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि संस्था का नाम विधिवत पंजीकृत हो चुका है, तो क्या दूसरे गुट को भी उसी नाम का इस्तेमाल करने की कानूनी अनुमति होगी? क्या भविष्य में नाम, पदनाम और संस्था की पहचान को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है?

जानकारों के मुताबिक, इसका वास्तविक जवाब संबंधित रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, संस्था के नियम-कायदे और लागू कानूनों को देखने के बाद ही स्पष्ट होगा।

समिति में बदलाव की भी चर्चा
सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में एक परिषद की समिति का रूप ले सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निर्णय या अधिसूचना सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अखाड़ा परिषद की तस्वीर किस दिशा में जाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

अब निगाहें अगले कदम पर
अखाड़ा परिषद को लेकर पहले से चल रही गुटबाजी के बीच रजिस्ट्रेशन का मुद्दा सामने आने से विवाद का दायरा और बढ़ता नजर आ रहा है। यदि संस्था के नाम को लेकर वास्तव में कोई कानूनी संरक्षण लिया गया है, तो उसके दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भविष्य में ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’ नाम से सिर्फ एक ही संस्था कानूनी रूप से सामने रहेगी, या दोनों गुट अपने-अपने दावे के साथ आगे बढ़ेंगे?
देखना होगा कि अखाड़ों की इस अंदरूनी जंग का अगला अध्याय क्या मोड़ लेता है।

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