हरिद्वार। कनखल स्थित श्री सूरत गिरि बंगला गिरिशानंद आश्रम में आयोजित बहुदिवसीय योग शिविर का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य समापन हुआ। आश्रम के परमाध्यक्ष अद्वैत पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर आचार्य स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज के मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं अनुकम्पा से 16 जून से संचालित योग शिविर में बड़ी संख्या में साधु-संतों, ब्रह्मचारियों, श्रद्धालुओं एवं योग साधकों ने सहभागिता कर योग के विभिन्न आयामों का अभ्यास किया।

शिविर के दौरान गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के योग विभाग के वरिष्ठ आचार्य एवं योग विशेषज्ञ प्रो. राजीव शर्मा ने प्रतिभागियों को योग, प्राणायाम, ध्यान तथा प्राकृतिक जीवन शैली से संबंधित महत्वपूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने योग को केवल शारीरिक व्यायाम न मानते हुए इसे शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का विज्ञान बताया। शिविर में प्रतिदिन प्रातःकाल योगाभ्यास, ध्यान एवं स्वास्थ्य संबंधी सत्र आयोजित किए गए, जिनका प्रतिभागियों ने भरपूर लाभ उठाया।

समापन समारोह एवं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के विशेष कार्यक्रम में आचार्य प्रणवानंद महाराज का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसायटी, अवधूत मण्डल आश्रम ज्वालापुर तथा नारायणम् हॉस्पिटल सेंटर कनखल के प्रतिनिधियों सहित अनेक संत-महात्मा, ब्रह्मचारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें योग को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आश्रम के कोठारी स्वामी उमानंद गिरि महाराज ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। योग न केवल शरीर को निरोग रखता है बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा से भी भरता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाव के लिए योग सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।
योगाचार्य प्रो. राजीव शर्मा ने कहा कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन स्थापित करता है। योग के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बन सकता है। उन्होंने सभी से प्रतिदिन कम से कम कुछ समय योग के लिए निकालने और इसे अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योग क्रियाओं, आसनों और प्राणायाम का सामूहिक प्रदर्शन किया गया। साथ ही स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े संदेश भी दिए गए। वक्ताओं ने कहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जिसे अपनाकर व्यक्ति स्वस्थ, सुखी और तनावमुक्त जीवन व्यतीत कर सकता है।
समापन अवसर पर उपस्थित संत-महात्माओं और अतिथियों ने आश्रम द्वारा आयोजित योग शिविर की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में स्वास्थ्य, अध्यात्म और संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योगाभ्यास करने तथा योग के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।


