शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में भारत को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में पिरोया : रविन्द्र पुरी

श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई आदी शंकराचार्य जयंती

हरिद्वार। अद्वैत वेदांत के प्रतिपादक आदी शंकराचार्य की जयंती श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुबह शंकराचार्य चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर संतों द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद श्रीकृष्ण निवास आश्रम में श्रद्धांजलि सभा एवं भंडारे का आयोजन हुआ। वहीं सूरत गिरि बंगला गिरिशानंद संन्यास आश्रम में भी जयंती के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती ने कहा कि आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में केरल के कालड़ी ग्राम में हुआ था। उनके पिता शिवगुरु और माता विशिष्टा देवी थीं। वे भगवान शिव के अवतार थे और उन्होंने सनातन धर्म के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व श्री पंचायती अखाड़ा महा निर्वाणी के सचिव श्रीमहत रविन्द्र पुरी ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में भारत को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में पिरोया। उन्होंने चारों दिशाओं में मठों की स्थापना की दक्षिण में श्रृंगेरी मठ, पूर्व में गोवर्धन मठ, पश्चिम में शारदा मठ और उत्तर में ज्योतिर्मठ। इन मठों के माध्यम से आज भी सनातन परंपरा एकजुट है। कहा कि मतभेदों को समाप्त करने के लिए आदि शंकराचार्य ने पंचायतन पूजा की व्यवस्था दी, जिसमें शिव, विष्णु, शक्ति, गणेश और सूर्य की एक साथ पूजा की जाती है।


कहा कि आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में पूरे देश का भ्रमण कर वैदिक परंपरा को सुदृढ़ किया। केवल 8 वर्ष की आयु में वेद-पुराणों का ज्ञान प्राप्त कर उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य पूर्ण किया।


इस अवसर पर स्वामी विशोकानंद भारती, स्वामी गिरधर गिरि, संतोषी माता, श्रीमहंत देवानंद गिरि, स्वामी उमानंद गिरि, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी केशवानंद, स्वामी रामानंद, स्वामी ललितानंद गिरि सहित विभिन्न अखाड़ों के अनेक संत-महंत उपस्थित रहे। जयंती कार्यक्रमों के माध्यम से संतों ने उनके आदर्शों को अपनाने और सनातन धर्म की एकता बनाए रखने का संदेश दिया।

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