हरिद्वार। दुर्गाचार्य साध्वी कंचन भवानी इन दिनों अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर सामने आ रहे उनके वीडियो में वह अखाड़ों और संत समाज से जुड़े कुछ लोगों को लेकर गंभीर आरोप और सवाल उठाती नजर आ रही हैं।
साध्वी कंचन भवानी ने कुछ वीडियो में अखाड़ों में महिलाओं के साथ कथित अमानवीय व्यवहार, महामंडलेश्वर बनाए जाने के नाम पर कथित लेन-देन और कुछ संतों के महिलाओं के साथ कथित संबंधो, बीबी-बच्चे होनें सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इन दावों को लेकर संत समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इसी बीच साध्वी ने कथित तौर पर मिल रही धमकियों का जिक्र करते हुए कुछ संतों के नाम लिए हैं और अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।
स्वामी रूद्रानंद गिरी प्रकरण की भी चर्चा
साध्वी कंचन भवानी के बयानों के बीच संत समाज से जुड़े पुराने विवादों और घटनाओं का भी उल्लेख किया जा रहा है। इसी क्रम में गुजरात के संत स्वामी रूद्रानंद गिरी का मामला भी सामने आया है। पूर्व में स्वामी रूद्रानंद गिरी ने कुछ संतों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे और हरिद्वार में पत्रकार वार्ता भी की थी। पत्रकार वार्ता के करीब 15 दिनों बाद उनकी निर्मम हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, इस प्रकरण को लेकर समय-समय पर कई सवाल भी उठते रहे हैं। पकड़े गए आरोपियों को न्यायालय द्वारा मामले से बरी भी किया जा चुका है। मगर बड़ा सवाल यह कि जब पकड़े गए आरोपी निर्दोष साबित हो गए तो असली हत्यारे कौन थे। न तो इस मामले में पुलिस ने ठोस कदम उठाया और न ही संत समाज की ओर से हत्यारों को पकड़ने के लिए आवाज उठी। हां इतना जरूर है कि गुजरात में हुई इस हत्याकांड़ की हरिद्वार में खासी चर्चा रही।
सुरक्षा और निष्पक्ष जांच पर जोर जरूरी
साध्वी कंचन भवानी की ओर से जताई गई आशंकाओं के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल उनकी सुरक्षा और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच का है। यदि उन्हें वास्तव में धमकियां मिली हैं तो पुलिस को विधिवत जांच करनी चाहिए।
कहीं ऐसा न हो की लोग बयानबाजी के मजे लेने में उलझे रहे और उधर साध्वी कंचन भवानी का हश्र भी स्वामी रूद्रानंद गिरि जैसा न हो जाए। फिलहाल उनके बयानों ने संत समाज और धार्मिक क्षेत्र में एक नई चर्चा जरूर छेड़ रखी है।


