अंगदान जीवन का सबसे अनमोल उपहार, जागरूकता से बच सकती हैं कई जिंदगियां

विश्व अंगदान दिवस पर लोगों से भ्रांतियां दूर कर अंगदान का संकल्प लेने की अपील


विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर लोगों से अंगदान के प्रति जागरूक होने और जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान देने के लिए अंगदान का संकल्प लेने की अपील की गई। प्रत्येक वर्ष 13 अगस्त को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है।


विशेषज्ञों के अनुसार, एक अंगदाता कई जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यकृत, गुर्दा, हृदय, अग्न्याशय, आंत, हृदय वाल्व और नेत्र जैसे अंगों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में अंगदान किसी जरूरतमंद के लिए जीवन का अनमोल उपहार साबित हो सकता है।


भ्रांतियों से बाहर निकलना जरूरी
अंगदान को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित हैं। इनमें धर्म द्वारा अंगदान की अनुमति न देना, अंग निकालने के बाद शरीर के विकृत हो जाने, किडनी दान के बाद कमजोरी आने या आजीवन दवाइयां लेने की जरूरत पड़ने तथा अधिक आयु में अंगदान न कर पाने जैसी धारणाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अंगदान की पात्रता का निर्णय आवश्यक स्वास्थ्य जांच के बाद संबंधित चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है।


ब्रेन डेथ में अंगदान का विशेष महत्व
ब्रेन डेथ की स्थिति में अंगदान का विशेष महत्व होता है। इस स्थिति में मस्तिष्क की सभी क्रियाएं स्थायी रूप से बंद हो जाती हैं, जबकि कृत्रिम चिकित्सा सहायता से हृदय कुछ समय तक धड़कता रह सकता है। निर्धारित चिकित्सीय प्रक्रिया और नियमों के तहत इस दौरान कई अंगों को प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किया जा सकता है। वहीं मृत्यु के बाद सीमित समय के भीतर कॉर्निया का उपयोग भी संभव हो सकता है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अंगदान पूरी तरह स्वैच्छिक निर्णय है और किसी व्यक्ति पर इसके लिए दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। लोगों से अपील की गई कि वे जीवनकाल में ही अंगदान का संकल्प लें और अपने परिवार को भी इसकी जानकारी दें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर परिजन उनके निर्णय से अवगत रहें।


पंजीकरण की जानकारी भी जरूरी
अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले मरीजों को लाइसेंस प्राप्त अंग प्रत्यारोपण केंद्र से संपर्क कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी चाहिए। साथ ही NOTTO (National Organ & Tissue Transplant Organization) के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।


फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग के अध्यक्ष तथा इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजीव गुलाटी ने लोगों से अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी के माध्यम से अंगदान को लेकर बनी भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है और जरूरतमंद मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगाई जा सकती है।

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