हरिद्वार। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद दर्ज हुए हलाला और तीन तलाक के पहले चर्चित मामले में अब नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि मामले से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से पीड़िता के भाई का मोबाइल फोन हैक कर लिया गया। शिकायत के आधार पर बुग्गावाला थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मोबाइल हैक कर डाटा डिलीट किए जाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। इस घटना के बाद पूरे मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है, क्योंकि यह उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद हलाला और तीन तलाक से जुड़ा पहला हाई-प्रोफाइल मामला माना जा रहा है।
पीड़िता के भाई ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उसने कुछ समय पहले एक वेबसाइट बनाई थी। आरोप है कि उसकी बहन के पति के रिश्तेदार रहमान ने उसका मोबाइल फोन हैक कर लिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी ने उसकी ई-मेल आईडी और पासवर्ड तक पहुंच बनाकर मोबाइल का पूरा डाटा गायब कर दिया।
इतना ही नहीं, मोबाइल में मौजूद केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल फाइलें भी डिलीट कर दी गईं। परिवार का आरोप है कि ये सभी दस्तावेज मुकदमे में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किए जाने थे और उन्हें जानबूझकर हटाया गया ताकि केस को कमजोर किया जा सके। मामले की शिकायत मिलने के बाद उत्तराखंड पुलिस ने तकनीकी स्तर पर जांच शुरू की। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद आरोपी रहमान के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया।
इस पूरे मामले की शुरुआत पांच अप्रैल 2026 को हुई थी, जब पीड़िता ने पुलिस में शिकायत देकर अपने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
महिला ने अपने पति पर तीन तलाक देने और हलाला के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक पहुंची, जिसके बाद तत्काल मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कई लोगों से पूछताछ के बाद हाल ही में रुड़की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। बताया जा रहा है कि चार्जशीट दाखिल होने के महज कुछ दिन बाद अब मोबाइल हैकिंग और डिजिटल सबूत मिटाने का मामला सामने आने से जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
यूसीसी लागू होने के बाद पहला चर्चित मामला
यह मामला इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद हलाला और तीन तलाक से जुड़ा यह पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें नई कानूनी व्यवस्थाओं के तहत कार्रवाई की गई। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई समान नागरिक संहिता के तहत हलाला जैसी प्रथाओं को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में इस केस को कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर बेहद अहम माना जा रहा है।
बुग्गावाला थाना प्रभारी अंकुर शर्मा ने बताया कि पीड़िता के भाई ने अपने जीजा के रिश्तेदार पर मोबाइल हैक कर डाटा डिलीट करने के आरोप लगाए थे। मामले की जांच कराई गई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों को लेकर तकनीकी जांच भी कराई जा रही है और जरूरत पड़ने पर साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़िता के परिवार ने सुरक्षा की मांग भी उठाई है।


