निष्कासित संत बना रहा महामंडलेश्वर, नियुक्ति से साधु-संतों में रोष

हरिद्वार। अखाड़ा परंपराओं को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, श्री पंचायती अखाड़ा निरंजन अखाड़े से जुड़े साधु कृष्णागिरी को अटल अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाए जाने की प्रक्रिया ने साधु-संतों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है।


बताया जा रहा है कि अटल अखाड़े के निष्कासित mahant बलराम भारती द्वारा कृष्णागिरी को आज महामंडलेश्वर घोषित किया जा रहा है, जबकि अटल अखाड़े में इस प्रकार की कोई परंपरा नहीं है । सबसे अहम बात यह है कि निष्कासित बलराम भारती को अटल अखाड़ा पहले ही आजीवन निष्कासित कर चुका है और इसकी सूचना अन्य अखाड़ों को भी दे दी गई थी।
इसके बावजूद, एक निष्कासित संत द्वारा किसी अन्य अखाड़े के साधु को महामंडलेश्वर बनाए जाने की इस पहल को अखाड़ा परंपराओं और नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है।
अखाड़ों के कई संतों ने इस पूरे मामले की कड़ी निंदा की है।

उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल परंपराओं का उल्लंघन हैं, बल्कि अखाड़ों की गरिमा और अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। संतों ने स्पष्ट किया कि अखाड़ों में पदों की नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया और परंपरा के तहत होती है, जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


संत समाज ने मांग की है कि इस मामले में संबंधित अखाड़े और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद उचित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और अखाड़ों की परंपरा एवं मर्यादा बनी रहे।

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