श्रीमहंत से 50 लाख की रंगदारी और झूठे मुकदमे की धमकी, न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल

हरिद्वार। कनखल क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक अखाड़े के श्रीमहंत ने तीन लोगों पर 50 लाख रुपये की अवैध मांग, षड्यंत्र और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। इस संबंध में प्रार्थी ने न्यायालय श्रीमान द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट, हरिद्वार में प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र संख्या 216/2025 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया है।


प्रार्थी श्रीमहंत सत्यम गिरि (आयु 44 वर्ष), जो श्री शम्भू पंचायती अटल अखाड़ा, कनखल में श्रीमहंत के पद पर कार्यरत हैं, ने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि बलराम भारती (आयु 58 वर्ष), रागिनी पाण्डेय (आयु 35 वर्ष) तथा एक अन्य व्यक्ति ‘मिश्रा’ (कानूनी सलाहकार) ने मिलकर उनके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचा।


प्रार्थी के अनुसार, बलराम भारती को पहले अखाड़े द्वारा प्रयागराज स्थित आश्रम का महंत नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में उनके कार्यों पर सवाल उठने लगे। आरोप है कि बलराम भारती ने अखाड़े की धनराशि का दुरुपयोग किया और बिना अनुमति के रागिनी पाण्डेय को साथ रखा। साथ ही, उन पर धन के गबन और अवैध लेन-देन के भी आरोप लगाए गए हैं।


प्रार्थी का कहना है कि जब अखाड़े के अन्य साधुओं ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें झूठे बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी और अवैध धनराशि की मांग की। कुम्भ मेले के दौरान व्यस्तता के कारण तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी, लेकिन बाद में 20 अप्रैल 2025 को बलराम भारती को अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया।


इसके बावजूद, आरोप है कि तीनों आरोपियों ने मिलकर प्रार्थी से 50 लाख रुपये की मांग की और न देने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। प्रार्थी के अनुसार, इस षड्यंत्र में मोबाइल फोन, व्हाट्सएप संदेश और बैंक खातों के माध्यम से लेन-देन और बातचीत के साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें पेनड्राइव के माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।


प्रार्थी ने यह भी बताया कि इस मामले में थाना कनखल पुलिस को शिकायत देने और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को रजिस्टर्ड डाक से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।


प्रार्थना पत्र में न्यायालय से मांग की गई है कि आरोपियों के खिलाफ संज्ञेय अपराध के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराई जाए, ताकि पूरे षड्यंत्र का खुलासा हो सके और दोषियों को दंडित किया जा सके।

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