डिप्रेशन से मुक्ति और भागदौड़ भरी जिंदगी में मन की शांति और अध्यात्म का महत्व
आजकल बहुत ज़्यादा नौजवान डिप्रेशन से गुज़र रहे हैं। अगर यही हालात रहे, तो आने वाले 25 से 50 सालों में पूरा देश डिप्रेशन में होगा और कोई नहीं बचेगा। नौजवान कोई भी बात अंदर लेकर बैठ जाता है, किसी से साझा नहीं करता और वो बात गहरी हो जाती है। पहले संयुक्त परिवार (ज्वाइंट फैमिली) होती थीं, तो राह दिखाने वाले कई लोग होते थे। हम अंकल, मामा या बुआ के पास चले जाते थे। परिवार में प्रेम था, लेकिन अब वो प्रेम नहीं रहा। अब ईर्ष्या आ गई है और जॉइंट फैमिली अब ‘जेलेस फैमिली’ बन गई है। फिर बाहरी विकास इतना ज़्यादा हो गया है। पहले मोबाइल, कंप्यूटर, गाड़ियाँ नहीं थीं; सब कुछ सीमित (लिमिटेड) था, इसलिए खुशियाँ थीं। हमें अपने लिए उतना नहीं चाहिए जितना हम दूसरों को देखकर चाहते हैं।
दूसरे के पास बड़ी गाड़ी या फ्लैट है, तो हमारे पास भी होना चाहिए। जब कुछ नहीं था, उस समय कोई प्रॉब्लम नहीं थी। पर अब विकास इतना हो गया है कि हर इंसान को बड़ा घर, गाड़ी और पैसा चाहिए, ‘और’-‘और’ होना चाहिए। उसके लिए भागना पड़ता है। खर्चे इतने हैं कि पहले पति भागता था, अब पत्नी भी काम पर जा रही है। बच्चा पैदा करना ही है, और जॉइंट फैमिली अब रही नहीं। अब बच्चे को वो प्यार मिलता नहीं। जब वो बड़ा होता है, तो सोचता है बाहर प्यार है। वो अट्रैक्शन को प्यार समझ बैठता है, रिलेशनशिप बनते हैं और फिर ब्रेकअप हो जाता है। उसको बहुत ठेस पहुँचती है, जिसके बाद फिर ड्रग्स और ड्रिंक्स आ जाते हैं। करियर चौपट हो जाता है और वो अकेलेपन में चला जाता है। फिर वो सोचता है कि अब सुसाइड (आत्महत्या) कर लेते हैं। किसी के पास टाइम है नहीं, पूछने वाला कोई है नहीं, सब व्यस्त हैं।
बिना ज़िंदगी को समझे बच्चे एकांत में जा रहे हैं। वो कुछ भी दिमाग में बैठा लेते हैं और उसमें अटक जाते हैं। मोबाइल खासतौर पर ओवर-थिंकिंग (ज़्यादा सोचने) का कारण है। अगर तुम मोबाइल को टाइम-टेबल में ले आओ, तो चीज़ें बेहतर हो जाएँगी। डिप्रेशन से जूझ रहे नौजवानों के कारण उनके माँ-बाप भी परेशान हैं। बच्चे दुखी हैं, तो माँ-बाप भी दुखी हैं। देखो, कितनी आत्महत्याएं हो रही हैं! पर शरीर के मरने के बाद कुछ अच्छा हासिल नहीं होता, सिर्फ आत्मा का प्रस्थान होता है। जब शरीर में ऊर्जा, चेतना या आत्मा आती है, तो उसे हम जन्म कहते हैं; और जब बाहर निकल जाती है, तो वो मौत है। कौन जन्म ले रहा है और कौन मर रहा है? बॉडी तो वहीं पड़ी रहती है, इसलिए जन्म और मृत्यु है ही नहीं। तुम इस शरीर में सिर्फ यात्री हो। इस अमूल्य शरीर को अगर मार दिया, तो जिसने तुम्हें गर्भ में नौ महीने मल-मूत्र के अंदर बैठाकर बनाया है, वो इसका हिसाब-किताब माँगेगा।
इस शरीर रूपी साधन का ये बुनियादी ज्ञान, कि आत्मा शरीर को चलाती है, जानना ज़रूरी है। अध्यात्म से तुम जान पाते हो कि तुम कौन हो। इस शरीर रूपी वाहन को जानो कि मैं कौन हूँ, ये ज़िंदगी क्या है, हम यहाँ क्यों आए हैं और यह क्या खेल है? जैसे हम डॉक्टर, मंत्री, चार्टर्ड अकाउंटेंट कैसे और क्यों बने? ये मेरी पत्नी, बच्चे कैसे और क्यों हैं? कैसा लगता है जब हम शरीर से निकल जाते हैं? यही ज्ञान सब ईश्वरीय व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों जैसे गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, जीसस, मोहम्मद, कबीर, फरीद, मीराबाई, सहजोबाई, लल्लाबाई ने पाया था; ये सब भी हमारे जैसे ही थे। ईश्वरवाद ही मनुष्य का आखिरी विकास है। मुख्य उद्देश्य अंतिम सौ प्रतिशत विकास ही है कि जब ऊर्जा या आत्मा (एनर्जी-सोल) शरीर से बाहर निकले, तब तुम्हारा ईश्वरीय दुनिया यानी पारब्रह्म, सचखंड में स्वागत हो। जब तुम अपने मुख्य मूल और अस्तित्व का अनुभव कर लेते हो, तो ज़िंदगी खुशहाल बन जाती है।
यही वाणी कहती है, और सिर्फ एक वाणी रोज़ सुनने से सारे कष्ट दूर हो जाएँगे। अपने आप अंदर से नकारात्मकता (नेगेटिविटी) बाहर आएगी। जो लोग डिप्रेशन में जा रहे थे, अब उनकी गोलियाँ बढ़ नहीं रहीं, दवाइयाँ वहीं रुक गई हैं और उन्होंने ज़िंदगी का मज़ा लेना शुरू कर दिया है। आध्यात्मिकता हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संसार को स्पिरिचुअल टेबलेट यानी ऐसी वाणी चाहिए जो इस शरीर का और आत्मा का ज्ञान दे, कि ये जन्म-मृत्यु क्या है, हम क्यों आए हैं, मृत्यु के बाद क्या, ये खेल क्या है? इस आत्मा के खेल को समझने को ही अध्यात्म कहते हैं। आत्मा मतलब अंदर की ऊर्जा, जो एक से दूसरे शरीर में जाती है।
इसे समझते ही ज़िंदगी बहुत मौज में आती है। सिर्फ 3 से 30 लेक्चर्स या वाणी सुनने से बहुत बड़ा अनुभव होगा, जीवन में अंतर दिखेगा, दवाइयाँ बढ़ेंगी नहीं और लोग ज़िंदगी जीना शुरू कर देंगे। जो इसे नियमित सुनते हैं, उनमें महान बदलाव देखा गया है। जब तुम इस शरीर रूपी इंस्ट्रूमेंट को समझ जाओगे, तो अपनी ज़िंदगी का आनंद ले पाओगे। और जब बच्चा खुलकर ज़िंदगी जीता है, तो पूरा परिवार भी खुश होता है।
MAAsterG का अनमोल एवं आलौकिक ज्ञान उनके यूट्यूब चैनल ‘MAAsterG’ और ‘GOD HOME JOURNEY’ पर निशुल्क उपलब्ध है। MAAsterG गारंटी देते हैं की ३-३० लेक्चर सुनने से ही आपको अपने जीवन में परिवर्तन दिखेगा।

