हरिद्वार में “अखिल भारतीय संत परिषद” का गठन, सनातन धर्म रक्षा को लेकर नई पहल


हरिद्वार। वैशाख कृष्ण पक्ष अमावस्या के पावन अवसर पर हरिद्वार स्थित शांम्भवी धाम, भूपतवाला में “अखिल भारतीय संत परिषद” की स्थापना की औपचारिक घोषणा की गई। परिषद का उद्देश्य सनातन धर्म, वेदसम्मत संत परंपरा, भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति और धर्म मर्यादाओं की रक्षा बताया गया है। इस अवसर पर देशभर से जुड़े संतों एवं धर्माचार्यों की उपस्थिति में परिषद के गठन का संकल्प लिया गया।

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परिषद के संस्थापक एवं शांम्भवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में संत समाज और सनातन परंपराओं के समक्ष गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक धार्मिक संस्थाएं और अधिकांश अखाड़े सत्ता के प्रभाव और दबाव में अपनी स्वतंत्रता एवं धर्मनिष्ठा खोते जा रहे हैं, जिसके कारण धर्म की मर्यादाओं का लगातार ह्रास हो रहा है।


उन्होंने कहा कि संतों पर हो रहे अन्याय, सनातन परंपराओं के क्षरण, अशास्त्रीय एवं अवैदिक अखाड़ों के निर्माण तथा अयोग्य व्यक्तियों के संन्यास परंपरा में प्रवेश जैसे विषयों पर कोई प्रभावी आवाज नहीं उठ रही है। उनका कहना था कि अधिकांश संस्थाएं राजनीतिक दबाव के चलते मौन बनी हुई हैं और यह स्थिति केवल संत समाज ही नहीं, बल्कि पूरे सनातन धर्म के लिए चिंता का विषय है।


स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने स्पष्ट किया कि अखिल भारतीय संत परिषद किसी राजनीतिक प्रभाव में कार्य करने वाली संस्था नहीं होगी। उन्होंने कहा कि परिषद संत समाज की गरिमा, वेदसम्मत संन्यास परंपरा, धर्म की शुचिता और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगी।


परिषद द्वारा घोषित प्रमुख उद्देश्यों में संत समाज की गरिमा एवं स्वतंत्रता की रक्षा, सनातन धर्म की मर्यादाओं का संरक्षण, वेद एवं शास्त्रसम्मत संत परंपरा का संवर्धन, अशास्त्रीय एवं अवैदिक प्रवृत्तियों का विरोध, संतों पर हो रहे अन्याय के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाना, गुरुकुल एवं संस्कृत शिक्षा का संरक्षण, गौसंरक्षण को बढ़ावा देना तथा समाज में धर्म आधारित नैतिक जागरण उत्पन्न करना शामिल है।


इस ऐतिहासिक अवसर पर परिषद के 11 संस्थापक सदस्य उपस्थित रहे, जिनकी सामूहिक सहमति एवं संकल्प से परिषद की स्थापना की घोषणा की गई। सभा में मौजूद संतों ने संकल्प लिया कि परिषद संत समाज को राजनीतिक आश्रयवाद से मुक्त कर धर्म आधारित आत्मसम्मान एवं स्वतंत्र स्वर प्रदान करने का कार्य करेगी और सनातन धर्म की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में समस्त संतों, धर्माचार्यों एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से इस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अभियान से जुड़ने का आह्वान किया गया।
परिषद के संस्थापक सदस्यों में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज, स्वामी सोमेश्वरा नन्द गिरी, स्वामी आनंद स्वरूप महाराज, विनोद महाराज, वेद प्रकाशाचार्य, प्रणव दास महाराज, सौरभ कृष्ण ब्रह्मचारी, स्वामी चरणाश्रित गिरी महाराज, कार्तिक गिरी महाराज, केशवानंद गिरी महाराज एवं कृष्णानंद गिरी महाराज शामिल रहे।

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