अभा संत आश्रम परिषद’ का गठन, स्वामी प्रबोधानंद गिरि बने अध्यक्ष

हरिद्वार। भूपतवाला क्षेत्र स्थित ओम मुरारी आश्रम, रानी गली में सोमवार को आश्रमधारी महामंडलेश्वर, महंत एवं संतों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बाबा हठयोगी महाराज ने की, जिसमें सैकड़ों संतों ने भाग लिया।
बैठक में संतों और आश्रमों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से संतों पर हो रहे हमलों और आश्रमों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। संतों ने एक स्वर में कहा कि प्रशासन का रवैया कई बार उपेक्षापूर्ण रहता है, जिससे सुरक्षा का मुद्दा और गंभीर हो जाता है।


इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सभी संतों ने सर्वसम्मति से ‘अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद’ के गठन का निर्णय लिया। यह संगठन 127 संप्रदायों को जोड़ते हुए देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर के आश्रमों और संतों का प्रतिनिधित्व करेगा।
बैठक में सर्वसम्मति से महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी महाराज को परिषद का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया। संतों के आग्रह को स्वीकार करते हुए उन्होंने इस दायित्व को ग्रहण किया और कहा कि “संतों की सेवा ही भगवान की सेवा है, और मैं इसे पूर्ण निष्ठा से निभाऊंगा।”


राष्ट्रीय परिषद की घोषणा
अध्यक्ष बनने के बाद स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने एक प्रारंभिक राष्ट्रीय परिषद की घोषणा की और भविष्य में एक विस्तृत राष्ट्रीय परिषद बनाने का आश्वासन भी दिया।


घोषित पदाधिकारी इस प्रकार हैं:
संरक्षक: बाबा हठयोगी महाराज, स्वामी गोपाल गिरी महाराज
उपाध्यक्ष: स्वामी विनोद
महामंत्री: स्वामी राम विशाल दास
सह महामंत्री: स्वामी सत्यव्रत आनंद सरस्वती
मंत्री: स्वामी ओम्मानंद
कोषाध्यक्ष: स्वामी स्वयं आनंद
संतों ने कहा कि संगठन का विस्तार शीघ्र ही पूरे देश में किया जाएगा, जिससे संत समाज, आश्रम, मठ एवं मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।


बड़ी संख्या में संतों की उपस्थिति
इस अवसर पर सैकड़ों महामंडलेश्वर, महंत और संत उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी महाराज, बाबा बलराम दास हठयोगी महाराज, स्वामी गोपाल गिरी महाराज, स्वामी स्वयं आनंद जी महाराज, स्वामी सत्यार्थ आनंद सरस्वती, स्वामी राम विशाल दास, स्वामी शिवानंद, स्वामी चंद्रभूषण आनंद सरस्वती, स्वामी विनोद महाराज, स्वामी देवानंद, स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी श्याम प्रकाश, स्वामी प्रज्ञानंद गिरी, स्वामी महानंद सरस्वती, आचार्य परम चैतन्य, महंत राधा गिरी, अवध गिरी, प्रहलाद दास, कैलाशानंद गिरी, स्वामी महेश्वरानंद, आचार्य शशिकांत, साध्वी निशा ज्योति सहित अनेक संत उपस्थित रहे।

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