स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज के ब्रह्मलीन होने पर श्रद्धांजलि सभा, संत वाटिका आश्रम में हुआ भंडारा
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित रानी गली के संत वाटिका आश्रम में स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज के ब्रह्मलीन होने पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं उनके अनुयायियों ने स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा के बाद आश्रम परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संतों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

श्रद्धांजलि सभा में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संत का जीवन सदैव परमार्थ और समाज के कल्याण के लिए होता है। स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज का अल्प आयु में संसार से चले जाना संत समाज और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
उन्होंने कहा कि इस संसार में जन्म और मृत्यु शाश्वत सत्य हैं। प्रत्येक व्यक्ति को एक दिन इस संसार का त्याग कर परमात्मा की शरण में जाना होता है। हालांकि किसी संत का अल्पायु में ब्रह्मलीन हो जाना अत्यंत कष्ट का विषय है। स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज ने अपने जीवन में आध्यात्मिक साधना, सेवा और परमार्थ के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य किया।
रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि संतों का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है। उनके विचार और संस्कार उनके अनुयायियों को सदैव सेवा एवं धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके भक्तों एवं अनुयायियों के कल्याण की कामना की।
स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने भी स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज का जीवन धर्म, अध्यात्म और परमार्थ की भावना से जुड़ा रहा। उनका अल्प आयु में ब्रह्मलीन होना संत समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि संत भले ही देह रूप में हमारे बीच न रहें, लेकिन उनके विचार, संस्कार और उनके द्वारा किए गए सेवा कार्य सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं।
स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि दिवंगत संत को परमात्मा अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके भक्तों और अनुयायियों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
बताया गया कि 15 अगस्त को स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज ने देह का त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए थे। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज एवं उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। इसी क्रम में संत वाटिका आश्रम में श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
इस अवसर पर स्वामी कृष्णानंद गिरि, स्वामी कमलानंद गिरि, महंत बंसी पुरी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा मौजूद रहे। स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज के भक्तगण राकेश मलिक, भाभी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भी उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
सभा में संतों ने स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज के आध्यात्मिक जीवन और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन भक्तों और समाज के लिए सदैव प्रेरणा बना रहेगा।
श्रद्धांजलि सभा के उपरांत संत वाटिका आश्रम में भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें संतों, भक्तों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया तथा स्वामी आशुतोष तीर्थ महाराज की स्मृति को नमन करते हुए उनके बताए परमार्थ एवं सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।


