शांभवी पीठाधीश्वर बोले, संतों के लिए दोहरा चरित्र उचित नहीं, हर मुद्दे पर समान रुख अपनाना चाहिए
हरिद्वार। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि महाराज द्वारा सांसद पप्पू यादव के भगवा धारण करने के विरोध को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संत समाज के लिए दोहरा चरित्र कभी भी उचित नहीं माना जा सकता और हर विषय पर समान सिद्धांतों के साथ आवाज उठाई जानी चाहिए।
स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि जिस प्रकार श्रीमहंत हरिगिरि महाराज पप्पू यादव के भगवा पहनने का विरोध कर रहे हैं, उसी प्रकार उन्हें उस समय भी मुखर होकर विरोध करना चाहिए था, जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन की रैली में हनुमान जी का नृत्य कराए जाने को लेकर सनातन परंपरा के अपमान की बात उठी थी।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि हरिगिरि महाराज स्वयं हनुमान जी के भक्त हैं, तो उस घटना पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से विरोध क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि संतों का दायित्व किसी व्यक्ति या दल विशेष के आधार पर नहीं, बल्कि धर्म और सिद्धांतों के आधार पर अपनी बात रखना होता है।
स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि संत समाज की गरिमा निष्पक्षता और समान दृष्टिकोण में निहित है। यदि किसी एक घटना पर विरोध और दूसरी समान प्रकृति की घटना पर मौन साध लिया जाए, तो इससे संत समाज की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि संतों के लिए दोहरा चरित्र घातक होता है और धर्म के प्रश्नों पर सभी के लिए एक समान मापदंड होने चाहिए।


