धर्म की आड़ में पनप रहे अपराधी : साध्वी त्रिकाल भवंता बोलीं, कुंभ में हो साधुओं का कैरेक्टर वेरिफिकेशन

आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच शंकराचार्य त्रिकाल भवंता सरस्वती महाराज ने सनातन धर्म की आड़ में कथित रूप से बढ़ रहे अपराधीकरण पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आपराधिक प्रवृत्ति के लोग साधु-संतों का वेश धारण कर धार्मिक संस्थाओं और अखाड़ों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
एक विशेष बातचीत में साध्वी त्रिकाल भवंता ने मांग की कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले में शामिल होने वाले सभी साधु-संतों और महंतों का चारित्रिक सत्यापन (कैरेक्टर वेरिफिकेशन) कराया जाए, ताकि धर्म के नाम पर होने वाली कथित धोखाधड़ी और समाज के शोषण पर रोक लगाई जा सके।

कुंभ तैयारियों पर उठाए सवाल
साध्वी ने सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि कुंभ के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि साधु-महंतों की नाराजगी को शांत करने के लिए उनके अखाड़ों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य और आर्थिक सहायता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि अक्टूबर के अंत में ध्वजारोहण के साथ कुंभ की औपचारिक शुरुआत होनी है और इसके बाद विभिन्न अखाड़ों का आगमन शुरू हो जाएगा, लेकिन तपोवन क्षेत्र में अभी तक पर्याप्त तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। साथ ही साधु-संतों को मूलभूत सुविधाओं के संबंध में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।

महिला अखाड़े को लेकर फिर उठाया मुद्दा
महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का उल्लेख करते हुए साध्वी त्रिकाल भवंता ने सवाल उठाया कि जब समाज के अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है, तो कुंभ और धार्मिक आयोजनों में महिला अखाड़ों को समान महत्व क्यों नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित साधु-महंत महिला अखाड़ों का विरोध इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से उनकी वास्तविकता सामने आ सकती है। साध्वी ने कहा कि धार्मिक कार्यों में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

अखाड़ा परिषद से पुराना विवाद
गौरतलब है कि पिछले नाशिक कुंभ मेले के दौरान भी महिला अखाड़े को मान्यता और साधु ग्राम में स्थान देने की मांग को लेकर साध्वी त्रिकाल भवंता और अखाड़ा परिषद के बीच विवाद सामने आया था। उस समय मामला पुलिस शिकायत तक पहुंच गया था और अखाड़ा परिषद ने उनके शाही स्नान में शामिल होने का विरोध किया था।
साध्वी का आरोप है कि प्रयागराज, उत्तराखंड और उज्जैन कुंभ में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद उनके साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता रहा है।

जून में होगी राष्ट्रीय साध्वी परिषद
सिंहस्थ कुंभ मेले में महिला साध्वियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और धर्म जागरण के उद्देश्य से 21 और 22 जून को नाशिक के तपोवन में राष्ट्रीय साध्वी परिषद का आयोजन किया जाएगा। परिषद में देशभर से हजारों महिला साध्वियों के शामिल होने की संभावना है।

साध्वी त्रिकाल भवंता ने बताया कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में धर्म के नाम पर चल रही कथित अनिष्ट प्रवृत्तियों, ढोंग और समाज को गुमराह करने वाले तत्वों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इसके लिए प्रशासन से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में साध्वी त्रिकाल भवंता के इन बयानों के बाद सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों, महिला अखाड़ों की भागीदारी और साधु-संतों के सत्यापन को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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