ऋषिकेश। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को ऋषिकेश में आध्यात्मिक और राजनीतिक गतिविधियों का विशेष संगम देखने को मिला। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन पहुंचकर भव्य गंगा आरती में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री एवं संत समाज के साथ मां गंगा की पूजा-अर्चना कर देश और समाज की सुख-समृद्धि तथा उन्नति की कामना की।

गंगा तट पर आयोजित आरती कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और संत समाज की भारी उपस्थिति रही। आरती के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। वैदिक मंत्रोच्चारण, दीपों की रोशनी और गंगा घाट पर उमड़े श्रद्धालुओं के बीच भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मां गंगा का आशीर्वाद लिया और उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत की सराहना की।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रवींद्र पुरी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे। नितिन नवीन ने संत समाज के साथ धर्म, संस्कृति और उत्तराखंड के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में धार्मिक पर्यटन, कुंभ मेला व्यवस्थाओं, सनातन संस्कृति के संरक्षण और युवाओं को भारतीय परंपराओं से जोड़ने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र है। यहां की धार्मिक परंपराएं पूरे विश्व को शांति और मानवता का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम पूरे कार्यक्रम के दौरान मुस्तैद नजर आई। घाटों और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि श्रद्धालुओं और वीआईपी मूवमेंट के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गंगा आरती के बाद नितिन नवीन ने संत समाज से आशीर्वाद लिया और प्रदेश के विकास, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण में संतों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने “हर हर गंगे” और “भारत माता की जय” के जयकारों से पूरे घाट क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।


