हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में बहुमत का विवाद अब एक दूसरे की लंगोटी उतारने तक पहुंच गया है। यही कारण है कि अब खुलकर एक दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं। दोनों ही गुट अपने बहुमत का दावा कर रहे हैं। एक पेड़ों की गिनती कर रहा है, जबकि दूसरा पेड़ों की शाखाओं की गिनती कर अपना बहुमत साबित करने का दावा कर रहा है।यानी की अखाड़े के असंतुष्ट गुटों को मिलाकर दूसरा गुट बहुमत होने का दावा कर रहा है।
आलम ये है कि एक गुट ने दस अखाड़े साथ होने का दावा किया है, तो दूसरा अपने साथ नौ अखाड़ों के समर्थक का दावा कर रहा है। हालांकि किसके पास बहुमत है और कौन अल्पमत में है उसका भी शीघ्र पटाक्षेप होने की संभावना है। बावजूद इसके कथित संतो को अपने वर्चस्व, बहुमत और रुतबे से ही लेना-देना है। इन कथित भगवाधारियों के कारण हो रही सनातन की छीछालेदार से इनका कोई वास्ता नहीं है। ऐसे में यह लोग क्या सनातन का उत्थान कर पाएंगे और क्या धर्म परायण जनता को सही मार्ग दिखा पाएंगे, इसकी कल्पना की जा सकती है।
कुछ जानकारों का मानना है कि जिस प्रकार से अखाड़ों के बीच विवाद गहराता जा रहा है उसको देखते हुए कुंभ का निर्विघ्न संपन्न होना मुश्किल दिखाई देता है, किंतु यह सत्यता से परे हैं। कुंभ निर्विघ्न संपन्न होगा और सभी तेरा अखाड़े उसमें अपना सहयोग करेंगे।
सभी जानते हैं की सरकार में बहुत शक्ति होती है और सरकार इनकी दुखती रागों को जानती भी है। अगर इनके द्वारा थोड़ी बहुत उछल कूद की गई तो सरकार के द्वारा एक नस दबाते ही यह उसी प्रकार सीधे हो जाएंगे जिस प्रकार से नाग बाहर टेढ़ा-मेढ़ा चलने के बाद अपने बिल में सीधा ही घुसता है।
फिलहाल सूत्रों की माने तो सरकार अखाड़ों को कुछ रकम देने की बात भी कर रही है। पैसा मिलने की संभावना को देखते ही कुछ को छोड़कर यह सभी एकता की बात और एकता का मंत्र जपने लगेंगे, क्योंकि जो भगवा धारण कर दलाली में मशगूल हो, संपत्तियों को बेचते हो, चुनाव में टिकट दिलवाने के नाम पर लोगों को ठगने का काम करते हों तो ऐसे लोग 2-5 करोड़ के लिए क्या नहीं कर सकते।
बात पैसे की भी यदि दरकिनार कर दें तो कुछ ऐसे भगवाधारी हैं जिनके ऐसे ऐसे कांड सरकार के संज्ञान में है की पलक झपकते ही ऐसे लोगों को जेल की हवा खाने से कोई नहीं रोक सकता। इस कारण कुंभ की निर्विघ्नता को लेकर कोई समस्या नहीं आने वाली। जो पद प्रतिष्ठा और पैसे के लिए तलवे चाटने तक गिर जाए वह क्या नहीं कर सकते और यूं भी सब की फाइल सरकार के पास है। सरकार जब चाहे तो इनकी चकरघिन्नी बना सकती है। यदि ऐसी नौबत आती है तो ये सब कुछ छोड़कर सरकार सरकार का और कुंभ कुंभ का ही जाप जपना शुरू कर देंगे।
खैर, जब तक यह एक दूसरे की लंगोटी खुद खोलने में लगे हुए हैं यह सरकार के लिए भले ही ठीक हो रहा हो, किंतु सनातन के लिए कदापि उचित नहीं कहा जा सकता।


