पांचवीं शंकराचार्य पीठ के ऐलान पर संत समाज में घमासान, आनंद स्वरूप की कड़ी चेतावनी-‘खिलवाड़ किया तो भेजेंगे जेल

हरिद्वार। तपोनिधि श्री निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा द्वारा पांचवीं शंकराचार्य पीठ बनाने की घोषणा को लेकर संत समाज में विवाद गहराता नजर आ रहा है। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने मिर्ची बाबा के बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और व्यवस्थाओं से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि शंकराचार्य की परंपरा सनातन धर्म की अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन व्यवस्था है। यह किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा या घोषणा से निर्धारित होने वाली व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा के अंतर्गत देश में चार प्रमुख शंकराचार्य पीठों की मान्यता रही है।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं आदि-अनादि काल से चली आ रही हैं और इनकी अपनी मर्यादा, मान्यता तथा धार्मिक व्यवस्था है। किसी भी व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर इन परंपराओं में बदलाव करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान सभी संतों और धर्माचार्यों को करना चाहिए।

स्वामी आनंद स्वरूप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि धर्म और परंपराओं का उपहास उड़ाने अथवा उनसे खिलवाड़ करने का प्रयास किया गया तो परिस्थितियां गंभीर हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि नियम-कानून और परंपराओं का उल्लंघन हुआ तो संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि मिर्ची बाबा को जेल तक जाना पड़े।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि सनातन धर्म की स्थापित परंपराओं से कथित छेड़छाड़ के प्रयास से है। उन्होंने कहा कि संत समाज की जिम्मेदारी केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि सनातन की परंपराओं और मर्यादाओं की रक्षा करना भी है।

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि शंकराचार्य की उपाधि और पीठ की स्थापना कोई सामान्य विषय नहीं है। इसके पीछे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय व्यवस्था जुड़ी हुई है। इसलिए इस प्रकार के निर्णय व्यापक धार्मिक विमर्श और स्थापित परंपराओं के अनुरूप ही होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की ताकत उसकी प्राचीन परंपराओं, संत परंपरा और धार्मिक मर्यादाओं में है। यदि हर व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार नई परंपराएं और नई पीठें स्थापित करने लगेगा तो इससे धार्मिक व्यवस्था को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने संत समाज से भी अपील की कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर बयानबाजी से पहले शास्त्रों और परंपराओं का अध्ययन किया जाए।

उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं और संत परंपराओं की अपनी गरिमा है। किसी भी घोषणा से पहले उसके धार्मिक और वैधानिक पक्ष पर विचार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि सनातन की परंपराओं से किसी भी कीमत पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा की ओर से पांचवीं शंकराचार्य पीठ बनाए जाने की घोषणा के बाद यह मुद्दा संत समाज में चर्चा का विषय बन गया है।

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