मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 101 महिलाओं की कलश यात्रा को किया रवाना
पिहोवा। संगमेश्वर महादेव मंदिर में पहली बार राज्यस्तरीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में 48 कोस क्षेत्र के संत-महात्माओं ने पहली बार एक मंच पर पहुंचकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने सभी संत-महात्माओं को चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया।
करीब दो घंटे से अधिक चले इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मुख्यमंत्री समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और सबसे पहले 101 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा को रवाना किया।

कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन उसकी आस्था और ध्वजा आज भी भारत की शक्ति और संस्कृति का संदेश दे रही है। उन्होंने बताया कि 1029 वर्ष पूर्व मोहम्मद गजनवी के आक्रमण के बाद भी मंदिर का कई बार पुनर्निर्माण हुआ और बाद में सरदार पटेल के प्रयासों से इसका भव्य जीर्णोद्धार कराया गया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार तीर्थ स्थलों के विकास, मंदिरों और सरोवरों के संरक्षण तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 48 कोस कुरुक्षेत्र क्षेत्र में कुल 367 तीर्थ स्थल हैं, जिनमें से अब तक 182 तीर्थ स्थलों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। सरकार द्वारा 134 स्थलों को पर्यटन एवं आध्यात्मिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में अरुणाय लंगर हॉल का उद्घाटन भी किया गया। साथ ही सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा द्वारा आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विषयक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में सोमनाथ मंदिर के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े पहलुओं को चित्रों और जानकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्वानों एवं पुजारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, बंसी पुरी महाराज तथा पंडित सतपाल सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे।


