जायफल रूचि उत्पन्न करनेवाला, जठराग्नि-प्रदीपक तथा कफ और वायु का शमन करनेवाला है। जायफल जितना वयस्कों के लिए हितकर है, उतना ही बालकों के लिए भी हितकर है। यह ह्रदयरोग, दस्त, खाँसी, उलटी, जुकाम आदि में लाभदायी है। यूनानी मतानुसार जायफल पेशाब लाने वाले, दुग्धवर्धक, नींद लानेवाले, पाचक व पौष्टिक होते हैं। वजन में हलके, पोले और रूखे जायफल कनिष्ठ और बड़े, चिकने व भारी जायफल श्रेष्ठ माने जाते हैं।
औषधीय प्रयोग
वात रोग
1 भाग जायफल चूर्ण तथा 2 भाग अश्वगंधा चूर्ण को मिलाकर रख लें। 3 ग्राम मिश्रण प्रतिदिन दूध के साथ लेने से वात रोगों में लाभ होता है एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
बच्चों के दस्त
जायफल व सौंठ को गाय के दूध में घिस के बच्चों को चटाने से जुकाम से होनेवाले दस्त बंद होते है।
अनिद्रा
जायफल चूर्ण को पानी के साथ लेने से अच्छी नींद आती है।
मंदाग्नि
जायफल चूर्ण शहद के साथ लेने से मंदाग्नि दूर होती है व ह्रदय को बल मिलता है।
मूँह की दुर्गंध
जायफल के टुकड़े को चूसने से दुर्गंध दूर होती है।
मात्रा
आधा से 2 ग्राम जायफल चूर्ण।
सावधानी
जायफल बार-बार अधिक मात्रा में लेने से वीर्य पतला हो जाता है, फलतरू पौरुषहीनता आती है। जायफल का प्रयोग बुखार, दाह व उच्च रक्तचाप में न करें।
Dr. (Vaidhya) Deepak Kumar
Adarsh Ayurvedic Pharmacy
Kankhal Hardwar
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