समिति ने वित्तीय अनियमितताओं, पारदर्शिता के अभाव और परंपरागत व्यवस्था से विचलन के आरोप लगाए; कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट में रिट व जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी
हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य उत्तराम्नाय बदरी ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम सेवा समिति ने स्वामी गोविन्दानन्द सरस्वती के निर्देश पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 15 दिन का अंतिम कानूनी नोटिस जारी कर बदरीनाथ धाम का प्रशासन उसकी लगभग 2500 वर्ष पुरानी आदि शंकराचार्य परंपरा को सौंपने की मांग की है।
समिति द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अधीन आने वाले मंदिरों के वर्तमान प्रशासन में कथित वित्तीय अनियमितताएं, दान राशि के दुरुपयोग, मंदिर संपत्तियों के संरक्षण में विफलता, पारदर्शिता के अभाव तथा सनातन परंपरा से विचलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।
समिति ने राज्य सरकार से 15 दिनों के भीतर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा में कोई कदम नहीं उठाया गया तो वह उच्च न्यायालय में रिट याचिका और जनहित याचिका (PIL) दायर करेगी।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार समिति ने मंदिर प्रशासन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, बीकेटीसी की आंतरिक जांच समितियों को समाप्त करने, बदरीनाथ मंदिर, नरसिंह मंदिर सहित संबंधित मंदिरों का प्रशासन उनके पारंपरिक संरक्षक जगद्गुरु शंकराचार्य उत्तराम्नाय बदरी ज्योतिर्मठ को सौंपने तथा मंदिर प्रशासन से राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त कर शास्त्रीय एवं सनातन परंपरा के अनुरूप व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
समिति ने यह भी कहा कि मंदिर के व्यावसायीकरण, पारंपरिक वैदिक पूजा-पद्धति, साधु सेवा, भिक्षा व्यवस्था, गुरुकुल परंपरा एवं धार्मिक संस्कारों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
समिति की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया कि यह सरकार को दिया गया अंतिम संवैधानिक अवसर है। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि भगवान बदरीनारायण की प्राचीन परंपरा, धार्मिक मर्यादा, वैदिक व्यवस्था और सनातन संस्कृति की रक्षा करना है। समिति के अनुसार यह केवल एक मंदिर का विषय नहीं बल्कि भारत की प्राचीन धार्मिक विरासत और संविधान प्रदत्त धार्मिक अधिकारों के संरक्षण से जुड़ा मुद्दा है।


