हरिद्वार। विकासखंड नारसन की ग्राम पंचायत पीरपुरा में मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि परिवहन विभाग के हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत व्यक्ति को मनरेगा मजदूर दर्शाकर भुगतान किया गया। मामले के उजागर होने के बाद संबंधित व्यक्ति ने 19,754 की पूरी राशि राजकोष में वापस जमा करा दी।
उप जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं जिला विकास अधिकारी के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर मनरेगा लोकपाल बी.एस. नेगी ने जांच कराई। शिकायतकर्ताओं फिरोज, अकिल, तौकिर, राशिद और इकबाल ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत पीरपुरा में तालाब की मिट्टी का अवैध विक्रय किया गया तथा मनरेगा के तहत फर्जी भुगतान किए गए। शिकायत में यह भी आरोप था कि हरिद्वार डिपो में संविदा परिचालक के पद पर कार्यरत वसीम पुत्र इदरीश को मनरेगा मजदूर दिखाकर मजदूरी का भुगतान किया गया।
लोकपाल ने बताया कि 29 मई 2026 को स्थलीय निरीक्षण एवं अभिलेखों का सत्यापन किया गया। तकनीकी जांच में अपर सहायक अभियंता (लघु सिंचाई) अरविंद कुमार भास्कर ने सहयोग किया। शिकायतकर्ताओं द्वारा मनरेगा से बनी सड़कों की गुणवत्ता जांच के लिए कोर कटिंग कराने की मांग भी की गई थी, लेकिन लोकपाल ने स्पष्ट किया कि मनरेगा के वार्षिक मास्टर सर्कुलर-2024 के अनुसार पांच लाख रुपये से कम लागत वाले कार्यों में कोर कटिंग का प्रावधान नहीं है और जांच में सभी कार्य इसी श्रेणी के पाए गए।
जांच के दौरान वसीम ने स्वीकार किया कि उनसे त्रुटिवश मनरेगा के तहत भुगतान प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के बाद उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत कोई कार्य नहीं किया। लोकपाल कार्यालय की कार्रवाई के बाद उन्होंने प्राप्त 19,754 की पूरी राशि खंड विकास अधिकारी, नारसन के कार्यालय में राजकोष में जमा करा दी तथा भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न होने का आश्वासन दिया।
लोकपाल बी.एस. नेगी ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित व्यक्ति उसी अवधि में परिवहन विभाग में संविदा परिचालक के रूप में कार्यरत थे, फिर भी उन्हें मनरेगा मजदूर दर्शाकर भुगतान किया गया। यह ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखों के सत्यापन में गंभीर लापरवाही का मामला है, जो मनरेगा की पारदर्शिता एवं जवाबदेही के विपरीत है।
मामले में दोषी पाए जाने पर लोकपाल ने ग्राम पंचायत पीरपुरा के संबंधित ग्राम रोजगार सहायक पर गलत मस्टर रोल में उपस्थिति दर्ज करने एवं गलत भुगतान की संस्तुति करने के लिए 1,000 तथा तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी पर भी 1,000 का जुर्माना लगाया है। साथ ही खंड विकास अधिकारी नारसन को निर्देश दिए गए हैं कि दंडादेश का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित कर निर्धारित अवधि में इसकी अनुपालन रिपोर्ट लोकपाल कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।


