सनातन धर्म, संस्कृति और मातृशक्ति सशक्तिकरण पर होगा मंथन, देशभर से जुटेंगी साध्वी-संत
हरिद्वार/नासिक। सनातन धर्म के संरक्षण, संस्कृति संवर्धन एवं मातृशक्ति के सशक्तिकरण को समर्पित “सनातन साध्वी अखाड़ा महापरिषद” का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 21 एवं 22 जून को महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में देशभर की साध्वी, संत, विदुषी महिलाओं एवं धर्मनिष्ठ समाजसेवियों की सहभागिता रहेगी।
सम्मेलन का नेतृत्व आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य त्रिकाल भवन्ता सरस्वती महाराज के सान्निध्य में होगा। आयोजन का उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा, मातृशक्ति जागरण तथा राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को सुदृढ़ करना बताया गया है।
आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में धर्म, संस्कृति, सेवा, संस्कार एवं संरक्षण जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। साथ ही सनातन परंपराओं के संरक्षण, गौ, गंगा एवं गीता के महत्व तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान साध्वी-संत समाज वर्तमान सामाजिक चुनौतियों, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा आने वाले धार्मिक आयोजनों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को लेकर रणनीति तैयार करेगा। आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में साध्वी एवं महिला धर्माचार्यों के शामिल होने की संभावना है।
महापरिषद की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि मातृशक्ति के जागरण से ही सुरक्षित, समृद्ध और संस्कारित भारत का निर्माण संभव है। इसी उद्देश्य के साथ सम्मेलन में सनातन संस्कृति के संरक्षण का सामूहिक संकल्प भी लिया जाएगा।
कार्यक्रम नासिक स्थित गोदावरी क्षेत्र के सभागार में आयोजित होगा, जहां दो दिनों तक विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों ने अधिकाधिक धर्मप्रेमियों से सम्मेलन में सहभागिता करने का आह्वान किया है।


