हरिद्वार। रुड़की निवासी संजय गिरी गोस्वामी के प्रयासों से लंदन की धरती पर छठी संत संसद का आयोजन किया गया। इससे पहले संत संसद का आयोजन अयोध्या, मुंबई, नोएडा, जयपुर और दिल्ली में किया जा चुका है। पहली बार देश से बाहर आयोजित संत संसद का आयोजन 6 से 15 अगस्त तक लंदन में हुआ।
संत संसद में भारत से 12 प्रमुख संतों ने भाग लिया। इसके अलावा इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका सहित विभिन्न देशों से भी संत एवं धर्माचार्य शामिल हुए। लंदन में संत तरलोचन दर्शन दास जी महाराज द्वारा स्थापित सचखंड नानक दर्शन धाम तथा सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राजराजेश्वर द्वारा स्थापित सिद्ध आश्रम में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
रुड़की-हरिद्वार स्थित जीवन दीप आश्रम के संस्थापक एवं जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर जगद्गुरु स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि महाराज ने संत संसद में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि सनातन धर्म ही मनुष्य मात्र का मूल धर्म है और मानवीय मूल्यों की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शांति, सद्भाव, प्रेम, करुणा, क्षमा और विश्व बंधुत्व का संदेश देता है। सनातन धर्म कभी युद्ध का पक्षधर नहीं रहा, बल्कि ‘जियो और जीने दो’ जैसी परोपकार की भावना को बढ़ावा देता है।
महामंडलेश्वर यतीन्द्रानन्द गिरि ने कहा कि आज पूरी दुनिया में नफरत, अलगाव, आतंकवाद और युद्ध का वातावरण दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म ही विश्व को सुख, शांति, प्रेम, सद्भाव और बंधुत्व का मार्ग दिखा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में भारत के प्रति सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि लंदनवासियों में देवभूमि उत्तराखंड के प्रति विशेष श्रद्धा और सम्मान देखने को मिला।
संत संसद के दौरान 15 अगस्त को भारत का स्वतंत्रता दिवस भी लंदन में धूमधाम से मनाया गया। लंदन के हैरो क्षेत्र स्थित सिद्ध आश्रम चौक पर तिरंगा फहराया गया। कार्यक्रम में स्थानीय पार्षदों, सांसदों और बड़ी संख्या में लंदनवासी शामिल हुए।
महामंडलेश्वर यतीन्द्रानन्द गिरि ने बताया कि संत संसद के आगामी बड़े आयोजन ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, अमेरिका, हॉलैंड, मॉरीशस और दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और विश्व बंधुत्व का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाया जाएगा।


