संतों की जुबानी जंग में नया मोर्चा, अब खुलेंगे कई बड़े राज!

संतों के बीच बयानबाजी का घमासान तेज, एक और भगवाधारी के मैदान में उतरने की चर्चा

हरिद्वार। इन दिनों संत समाज के बीच चल रही जुबानी जंग ने नया और तल्ख मोड़ ले लिया है। कभी एक-दूसरे पर तीखे शब्दों के तीर चल रहे हैं तो कभी संतों के बीच पुराने विवाद फिर से सतह पर आते दिखाई दे रहे हैं। आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला इस कदर बढ़ चुका है कि अब इस लड़ाई के कई मोर्चे खुलते नजर आ रहे हैं।

कहीं किसी को मिर्ची लग रही है तो कहीं किसी को सुर्पणखा और ताड़का जैसे विशेषणों से नवाजा जा रहा है। दूसरी ओर पूर्व में विवादों के चलते संत समाज से निष्कासन का सामना कर चुके एक जगद्गुरु की कथित धमकियों ने भी माहौल को और गरमा दिया है। हालाकि धमकी के साथ जगद्गुरु के मिमयाने के स्वर भी सुनायी दे रहे हैं। वहीं साध्वी भी पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रही हैं। अब एक यति और एक मेकअपधारी साध्वी के भी इस जुबानी रणभूमि में उतरने की चर्चा है।

जुबानी जंग या सनातन की साख पर वार?
सवाल यह उठ रहा है कि आखिर संत समाज के भीतर चल रही यह लड़ाई कहां जाकर थमेगी? जिस भगवा वस्त्र को संयम, त्याग और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है, उसी के साए में एक-दूसरे पर जिस तरह के आरोप और कटाक्ष किए जा रहे हैं, उसने सनातन की छवि को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है, उससे साफ है कि मामला अब केवल व्यक्तिगत तकरार तक सीमित नहीं रह गया है।

अब खुलेगा एक और फ्रंट!
इसी बीच इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा मोड़ आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, एक बड़े संत से कथित तौर पर तिरस्कृत होकर हरिद्वार छोड़ चुके एक अन्य संत अब खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि उक्त संत कई नामचीन भगवाधारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां हैं। चर्चा है कि इसी सप्ताह उनके द्वारा अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने रखा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो संत समाज के भीतर चल रही यह जुबानी जंग अचानक बड़े खुलासों के दौर में बदल सकती है।

स्टूडियो तैयार, कैमरा ऑन होने का इंतजार!
सूत्रों की मानें तो मोर्चा खोलने वाले बाबा का स्टूडियो लगभग तैयार हो चुका है और आने वाले दिनों में वह वीडियो के माध्यम से कई नामचीन चेहरों को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी में हैं। यानी अब तक जो लड़ाई संतों के मंचों, सभाओं और बयानों तक सीमित थी, वह कैमरे के सामने आ सकती है। इसके बाद कौन किस पर क्या आरोप लगाता है और किस पुराने राज का पिटारा खुलता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

पुरानी चोट, नया हिसाब?
कहा जाता है कि चोट खाया व्यक्ति और घायल सांप दोनों ही बेहद खतरनाक हो सकते हैं। इस मामले में भी चर्चाएं कुछ ऐसी ही हैं। सूत्र बताते हैं कि मोर्चा खोलने वाले संत के साथ अतीत में किसी नामचीन संत द्वारा कथित तौर पर ऐसा व्यवहार किया गया था, जिसकी टीस अब तक उसके दिल में बाकी है। अब यदि बाबा सचमुच खुलकर सामने आते हैं तो कई पुराने विवाद फिर से जिंदा हो सकते हैं। महिलाओं से जुड़े कथित संबंधों से लेकर हत्या, अपहरण और ठगी जैसे गंभीर आरोपों तक के मामलों का जिक्र होने की संभावना जताई जा रही है।

अब सवाल- कौन होगा बेनकाब?
फिलहाल हर नजर उस संभावित मोर्चे पर टिकी है, जिसके खुलने की चर्चाएं धर्मनगरी में जोर पकड़ रही हैं। यदि आने वाले दिनों में आरोपों और कथित खुलासों की बौछार शुरू होती है तो संत समाज के कई चर्चित चेहरों को जवाब देना पड़ सकता है।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों और आधिकारिक जांच से ही संभव होगी। लेकिन इतना तय है कि संतों की यह जुबानी जंग अब महज बयानबाजी नहीं रह गई है, इसके अगले अध्याय में कई पुराने पन्ने खुलने की आहट सुनाई दे रही है।

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