हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज के मनोनीत होने पर संत समाज में हर्ष का वातावरण है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर दाती महाराज ने दर्जनों संत-महात्माओं के साथ पहुंचकर श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज का पुष्पमाला, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य सम्मान किया तथा उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर दाती महाराज ने कहा कि श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज का अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर चयन पूरे संत समाज के लिए अत्यंत शुभ एवं हितकारी निर्णय है। उन्होंने कहा कि रविंद्र पुरी महाराज लंबे समय से संतों के बीच समन्वय, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण तथा सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनके अनुभव, नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शी सोच का लाभ अब पूरे देश के संत समाज को मिलेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रविंद्र पुरी महाराज के नेतृत्व में अखाड़ा परिषद और अधिक सशक्त होगी तथा देशभर के संतों के बीच आपसी समन्वय और एकता को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही धार्मिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर परिषद प्रभावी भूमिका निभाएगी।
महामंडलेश्वर दाती महाराज ने कहा कि आगामी हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में आयोजित होने वाले कुंभ एवं सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के संचालन और व्यवस्थाओं में भी उनके नेतृत्व का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि संत समाज के हितों की रक्षा, सनातन परंपराओं के संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में नई कार्यकारिणी महत्वपूर्ण कार्य करेगी।
इस अवसर पर उपस्थित संतों ने भी श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में अखाड़ा परिषद नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी तथा देशभर के अखाड़ों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
महामंडलेश्वर दाती महाराज ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की नवगठित कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की। उन्होंने कहा कि नई टीम संत समाज की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी उतरेगी और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाजहित के कार्यों को नई गति प्रदान करेगी।
कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं ने श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज का अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल एवं सफल कार्यकाल की कामना की। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक उल्लास और उत्साह का वातावरण बना रहा तथा संतों ने एकजुट होकर सनातन संस्कृति और संत समाज की मजबूती का संकल्प भी दोहराया।


