युद्ध ! आज दुनिया में अलग-अलग देशों में जो कोहराम चल रहा है, एक दूसरे के ऊपर कहीं ना कहीं कब्जा करने के लिए इच्छा जाग रही है, ये आने वाले तीसरे विश्व युद्ध की सुगबुगाहट है । विश्व युद्ध का मतलब है जहाँ पूरा विश्व उस युद्ध में शामिल हो जाता है । जो पहला और दूसरा विश्व युद्ध हुआ उसमें ज्यादातर लड़ाइयाँ बार्डर के आसपास के देशों के बीच होती थीं और युद्ध इतना लंबा नहीं चलता था । पर अब न्यूक्लियर बम आ गया है। दूसरे विश्व युद्ध में जब अमरीका ने जापान पर न्यूक्लियर बम का इस्तेमाल किया, उससे एक झटके के अंदर लाखों लोग मर गए। वो न्यूक्लियर बम उस समय सिर्फ अमरीका के पास था, पर आज न्यूक्लियर बम दुनिया में ना जाने कितने देशों के पास है !
जब भी विश्व युद्ध होगा, न्यूक्लियर बम इस्तेमाल होने वाले हैं और अगर ये बम इस्तेमाल हुए तो तबाही होगी । फिर सैंकड़ों, हजार, लाख नहीं, करोड़ों लोग मारे जाएँगे । इंसान का दिमाग आज इतना डिप्रेसड हो गया है, उसे पता ही नहीं है कि मैं क्या कर रहा हूँ । मरता तो इंसान ही है ना और सब इंसान एक ही हैं ! सबका एक ही बाप है । एक ही है जिसमें से सारे निकले हैं, वो चाहे जापानी हो, अमरीकन हो, रूसी हो, यूरोपियन हो, इजराइली हो, इंडियन हो । सब माँ के गर्भ से नौ महीने में ही पैदा हुए हैं और ऐसा भी नहीं है कि जब कोई मरेगा तो वो कहीं स्पेशल जगह जाएगा। श्वाँस निकलते ही जला देते हैं, दफना देते हैं, तो सब कहाँ गए? जिन्होंने बताया कि तू मरकर कहाँ जाएगा, उनको हम भगवान कहते हैं।
उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं, हम सबका बाप एक ही है। तो मरकर आगे कहाँ जाएंगे ! कोई कह रहा है कि चाहे तू किसी देश का कुछ भी हो, तू कुत्ता बन जायेगा या गधा बनेगा, पेड़-पहाड़ बनेगा, बंदर-बंदरी बनेगा और डेढ़ सौ साल पहले डार्विन ने प्रमाणित किया कि हमारे अंदर निन्यानवे प्रतिशत बंदर-बंदरी का डीएनए है। सोचो कि ये लड़ाई हो रही है पर क्या ये जमीन किसी की है, क्या आकाश किसी का है, क्या सागर किसी का है, क्या हवा किसी की है ! जिसने ये सब बनाया है वो हिसाब माँगेगा । शरीर के मरते ही वो कहेगा कि ओए, तू कौन होता है किसी को मारने वाला और तेरे पास जवाब नहीं होगा।
देखो हिटलर, तैमूरलंग, चंगेजखान, स्टालिन जैसे बड़े-बड़े धुरंधर इस दुनिया में हुए, पर कहाँ गए ? इस शरीर में अगर तू ‘मैं’ में जीया, अहंकार में रहा कि कर लो कब्जा, मार डालो इसको, लूट लो इसको, कि मैं ये हूँ, मैं वो हूँ तो आगे उतना ही टुकड़ों में काटा जाएगा और उतना ही मारा जाएगा । इसलिए ये युद्ध तब तक नहीं रुक सकते जब तक इंसान अपने को नहीं समझेगा कि ‘मैं कौन हूँ ?’ तो जब तक हम भगवान के शास्त्रों को नहीं जानेंगे , तब तक ये युद्ध चलता रहेगा, ये पागलपन चलता रहेगा । ये पागलपन अज्ञान के कारण है और जिस दिन ज्ञान मिल गया कि जीसस ने क्या कहा था, गुरु नानकदेव , राम, कृष्ण, महावीर, मोहम्मद साहब ने, कबीर ने, मीरा, सहजो ने क्या कहा, जिस दिन ये खोपड़ी में घुस गया तो युद्ध खत्म, कोई नहीं मारेगा ।
एक ना एक दिन तो पूरा का पूरा विश्व का नक्शा खत्म हो जाएगा । ना बचेगा अमरीका, ना रूस, ना यूरोप, ना इंडिया, कुछ भी नहीं बचेगा । कभी दुनिया में कुछ नहीं था, फिर कुछ नहीं हो जाएगा । तो एक ना एक दिन तो विश्व युद्ध होना ही है, युग तो खत्म होना ही है, पर अभी समय है । सुगबुगाहट है, शुरू होगा, जनसंख्या जब ग्यारह सौ करोड़ तक पहुँचेगी ।
पंद्रह सौ से दो हजार साल में अंत होगा। पर हमको घबराने की जरूरत नहीं है, बस एक ही घबराहट हो कि मैं स्वयं को जान लूँ और परमात्मा को उपलब्ध हो जाऊँ, परम आत्मा हो जाऊँ ताकि मेरा ये जन्म सफल हो सके। तो चलते रहो, अपना उद्धार करने के लिए स्वयं को जानो और इस मनुष्य जन्म से, इस मृत्युलोक से मुक्ति लो ।
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