अदृश्य ईश्वर का साकार रूप है पिता

आज फादर्स डे है। याद रखना, एक है जन्म देने वाला पिता, पर जन्म देने वाला पिता असल में, पिता नहीं है, बल्कि जन्म देने वाला तो, वो परमात्मा, ईश्वर, भगवान है। पर जब तुमने जन्म लिया, तो तुम्हारे मल-मूत्र को साफ करने वाला, दिन-रात मेहनत करके स्कूल में भेजने वाला, तुम्हारे लिए अपनी क्षमता से सब कुछ करने वाला, उसका बड़ा योगदान है। भगवान ने तुम्हें जन्म दिया और काम खत्म कर दिया, पर पिता तुम्हें पूरे अठारह साल पालता है, पोसता है, बड़ा करता है और दिन-रात देखभाल करता है। भगवान अदृश्य है, उसने जन्म दे दिया, पर पिता सेवा करने वाला है, वो तुम्हारी जन्म से ही सेवा करता है।

जब तक तुमने होश नहीं संभाला था, पाँच साल तक भी नहीं पहुंचे थे, तब तक पिता ने तुम्हारा मल-मूत्र उठाया। तुम किसी का मल-मूत्र उठाओ, तो मालूम पड़े। पिता तुम्हें क्या नहीं देता? तुमने पिता को क्या दिया, तुमने उनकी क्या सेवा की? अपने अंदर सोचो, कभी विचार आया कि मैं आज पिता के पाँव दबा दूँ, सिर दबा दूँ, कि अपने पिता की कुछ सेवा कर लूँ। तुमने आज तक उस पिता के लिए क्या किया, जिसको तुम ‘फादर’ कहते हो?

अगर तुम अपने पिता को उल्टा बोलते हो, तंग करते हो, दुखी करते हो, तो तुम अपने बद्कर्म बना रहे हो
। बद्कर्म वही है जो भगवान की नजर में अपराध बन जाता है। जिस भगवान ने तुम्हें जन्म दिया, पिता सेवा कर रहा है,(need to refer the Raw article as the sentence looks incomplete) और तुम उनकी बातें नहीं मानते, उन पर प्रश्न उठाते हो, तो भगवान की नजर में तुम गुनहगार बन जाते हो। इसका परिणाम भोगना पड़ेगा, क्योंकि कल तुम भी पिता बनोगे, कल तुम भी माँ बनोगी।

अगर तुम यहाँ संसार में बच भी गए, तो जिस दिन शरीर इस संसार से जाता है, जिसे मृत्यु कहते हैं, उस दिन भगवान तुमसे एक-एक पल का हिसाब माँगेगा। पिता तुम्हारा वो नहीं जो सिर्फ घर में है, वो तो सेवा करने वाला पिता है। जन्म देने वाला पिता अलग है। जिसने जन्म दिया, उसी परमात्मा ने पिता को कहा कि औलाद को बड़ा कर, सेवा कर इसकी। उस पिता ने अपनी ड्यूटी निभाई।

आज का फादर्स-डे सिर्फ भावना का दिन नहीं है, बल्कि ये आत्म-परीक्षण का दिन है। परमात्मा ने पिता को काम दिया कि सेवा कर और तुम्हे काम दिया कि शिकायत मत कर। जब तुम बड़े होगे, कमाओगे, शादी होगी, तब तुम भी पिता या माँ बनोगे। जो तुम कर रहे हो, वही तुम्हारी औलाद तुम्हारे साथ करेगी।

अध्यात्म में कहते हैं ‘लख चौरासी’, यानी चौरासी लाख योनियाँ। जब सजाएँ मिलती हैं, तब आत्मा सोचती है कि मुझसे क्या चूक हो गई। इसलिए आज का फादर्स-डे गुनाहों की क्षमा का दिन है। पिता के चरणों में जाकर, हाथ रखकर, माथा टेककर, अपनी बतमीज़ीयों की माफी माँगने का दिन है। पिता का अर्थ ही है—माफी। जैसे माँ माफ करती है, पिता माफ करता है, वैसे ही परमात्मा भी माफ करता है।

परमात्मा ने अठारह साल तक पिता को सेवा का अधिकार दिया। उसके बाद भी अगर पिता सेवा करता है, तो वो करुणा है। इसलिए धर्म बनता है कि जब वो बूढ़े हो जाएँ, तो उनकी सेवा की जाए। जिसने बचपन में तुम्हारा मल-मूत्र उठाया, अगर तुम उनके लिए डॉक्टर तक जाने को तैयार नहीं हो, तो परमात्मा एक-एक पल का हिसाब लेता है।

मौत तक एक ही रिश्ता सर्वोपरि है—माँ-बाप। बाकी रिश्ते बाद में आते हैं। अगर माँ-बाप की सेवा नहीं की, उनकी कदर नहीं की, तो जीवन में कभी शांति नहीं मिलेगी। बड़ी कुर्सियाँ, बड़ी नौकरियाँ भी दुख नहीं मिटा पाएँगी। ऋण नहीं चुकेगा, दुख पीछा करेगा। गलतियाँ हर इंसान से होती हैं, पर जो घुटने टेक कर माफी माँग लेता है, उसकी गलतियाँ माफ हो जाती हैं।

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