हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के चार संतों के निष्कासन के बाद सुलगी चिंगारी अंदर ही अंदर धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। जिसकी परिणति क्या होगी यह समय ही बताएगा, किन्तु इतना जरूर है कि जिस पश्चिम पंगत के संतों व श्रीमहंत का निष्कासन हुआ है उसमें पश्चिम पंगत के संतों की शह अवश्य है। वरना इतना बड़ा कदम नहीं उठाया जा सकता था।
बहरहाल दो दिन पूर्व निष्कासित किए गए पंच के श्रीमहंत रघुमुनि व कोठारी दामोदर दास ने बैठक कर पंच के तीन श्रीमहंतों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। भले ही बैठक हुई, निंदा प्रस्ताव पारित हुआ हो, मगर अखाड़ा सूत्र बताते हैं कि बैठक में मौजूद पश्चिम पंगत के मुकामी महंतों ने बैठक के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि निष्कासित संतों की पंगत के संत ही उनसे दूरी बना रहे हैं। ऐसे में निष्कासित हुए संतों के लिए आगे की लड़ाई और कठिन होने वाली है।


