भंडारा होगा या नहीं? कथित नामकरण को लेकर हरिद्वार में चर्चाओं का बाजार गर्म
हरिद्वार। एक साध्वी द्वारा एक अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर पर पिता बनने का आरोप लगाए जाने के बाद धार्मिक नगरी हरिद्वार में इस प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। संत समाज से लेकर आम लोगों तक के बीच अब बच्चे के कथित नामकरण संस्कार को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं।
संतों के बीच यह चर्चा भी हो रही है कि यदि नामकरण संस्कार आयोजित किया जाता है तो क्या इसके उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन होगा और संतों को दक्षिणा दी जाएगी या नहीं। कुछ संतों का कहना है कि भंडारा तो होना चाहिए, लेकिन दक्षिणा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि भारतीय परंपरा में नामकरण संस्कार के अवसर पर बच्चे को उपहार दिए जाते हैं, न कि उपहार लिए जाते हैं। संतों का कहना है कि नामकरण संस्कार होना ही चाहिए। क्यों की नामकरण 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है।
वहीं, कुछ संत इस पूरे मामले पर यह भी चर्चा कर रहे हैं कि यदि बच्चे का नामकरण संस्कार होता है तो कथित तौर पर “भाभी” की मुंह दिखाई की रस्म भी निभानी पड़ सकती है। ऐसे में संतों पर दोहरी जिम्मेदारी आ जाएगी, एक ओर बच्चे को उपहार देना होगा और दूसरी ओर मुंह दिखाई की परंपरा भी निभानी पड़ेगी।
हालांकि, संतों का कहना है कि खर्च चाहे जितना भी हो, यदि ऐसा अवसर आया तो “भाभी” की मुंह दिखाई भी हो जाएगी और कथित भतीजे के दर्शन भी साथ ही हो जाएंगे। फिलहाल पूरे मामले को लेकर संत समाज में चर्चाओं और कयासों का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस प्रकरण में क्या मोड़ आता है और संतों की यह चर्चित “मुराद” कब पूरी होती है।


