रघुमुनि बोले, अदालत ने पलटा निष्कासन का आदेश

कहा, भूमि विक्रय संबंधी दस्तावेज दुर्गादास प्रस्तुत करें तो छोड़ दूंगा अखाड़ा


हरिद्वार।
श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन कंे चार महंतों के निष्कासन के बाद से उत्पन्न हुई चिंगारी सुलगती ही जा रही है। अखाड़े के अंदर की लड़ाई अब न्यायालय तक पहुंच गई है।


इस संबंध में बड़ा अखाड़ा उदासीन कनखल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए पश्चिमी पंगत के श्रीमहंत रघुमुनि महाराज ने अपने ऊपर लगे आरोपी का खंडन किया। कहा कि जिन तीन महंतों ने अखाड़े के संविधान के विरूद्ध जाकर झूठा प्रस्ताव पास करके मुझे, सचिव अग्रदास, कोठारी दामोदर दास व दर्शन दास का निष्कासन किया उसको सिविल जज वरिष्ठ श्रेणी इलाहाबाद ने निरस्त कर यथा स्थिति बहाल करने के आदेश दिए हैं। कहाकि कोर्ट ने जो आदेश पारित किए हैं उसका हम स्वागत करते हैं। इसके साथ ही हमारे अखाड़े की परंपरा के अनुसार किसी भी महंत, सचिव अथवा कोठारी की नियुक्ति अथवा उसका निष्कासन अखाड़े की चारों पंगत करती हैं। अखाड़े की परंपरा के अनुसार ना तो किसी को संविधान के विरुद्ध व बिना चारांे पंगत के निर्णय के बिना निकाला जा सकता है और ना ही रखा जा सकता है। अब जो कोर्ट ने आदेश दिया है वह श्री महंत दुर्गादास की मंशा को दर्शाता है, जिसमें उन्होंने गलत आरोप लगाकर हमारा निष्कासन किया। आज इसी निर्णय को लेकर मथुरा की पंगत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह श्रीमहंत दुर्गादास एवं अन्य के साथ कोई संबंध नहीं रखेंगे।

जब उनसे पूछा गया कि आप पर अखाड़े की संपत्ति खुर्द खुर्द का आरोप लगाया गया तो उन्होंने कहा कि यदि महंत दुर्गादास अखाड़े की संपत्ति को बेचने संबंधी कोई भी दस्तावेज दिखा दें तो मैं अखाड़े की चाबियां सौंपकर निकल जाऊंगा। उन्होंने कहा कि अखाड़े की संपत्ति तो क्या 1 इंच भूमि भी कोई भी नहीं बेच सकता। उसके लिए बाकायदा महंतों के बीच में व सभी पंगत के बीच में प्रस्ताव पारित किया जाता है। इसकी पूरी एक प्रक्रिया होती है, जिसे पूरा करना होता है, क्योंकि यह कोई निजी भूमि नहीं जिसे जब चाहा किसी ने भेज दिया। इस अवसर पर कोठारी दामोदार दास व अन्य मौजूद रहे।

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