कोल्डड्रिंक या ठंडी-ठंडी मौत

दोस्तों क्या आप जानते है की कोल्ड्रिंक पिने से मृत्यु भी हो सकती है?
किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात अग्नि दाह संस्कार में देशी घी डाला जाता है। जिससे की पूरा शरीर जल सके व साथ मे हड्डिया भी काफी हद तक जल जाती है। लेकिन शायद यह कोई नही जानता है की दांत बिलकुल नहीं जलते है। और अगर दांत को मिट्टी में भी डाल दिया जाये तो 20 साल के बाद भी दाँत नहीं गलते हैं।
अब आप जरा गौर से सोचिये कि जिस दांत को घी की आग नहीं जला सकती है, जिस दाँत को मिट्टी भी नहीं गला सकती है। यदी आप उस दाँतों को किसी भी कोल्ड्रिंक में डाल दंे तो ज्यादा से ज्यादा 20 दिन में ही पूरा घुल जाता है तथा छानने पर भी दिखाई नही देता है।

कारण
कोल्ड्रिंक में फॉस्फोरिक एसिड (तेजाब ) नमक जहर होता है, जो मनुष्य के सबसे कठोर अंग दांत को ही नहीं बल्कि दुनिया के अधिकतर वस्तुओ यहाँ तक लोहे को भी पूरी तरह गला देता है। अब आप सोचिये कि कोल्ड्रिंक पीने से यह शरीर के कई नाजुक अंगांे के संपर्क में आता है तो उनका क्या हाल होता होगा।


क्यूंकि कोल्डड्रिंक में बहुत पानी होता है, इसलिए इसका असर धीरे धीरे होता है व् तत्काल दिखाई नही देता है। अहमदाबाद स्थित कंज्यूमर एजुकेशन एंड रिचर्स सेण्टर द्वारा जाँच करने पर कोल्ड्रिंक में कार्बोलिक एसिड, अरिथर्बिक एसिड व् बेजोइक एसिड नामक तेजाब भी पाये गए हैं। रसायन विज्ञान का कोई भी विधार्थी जानता है की एसिड की तीव्रता च्ी पेपर से पता किया जा सकता है। पीएच 7 जितना कम होगी एसिड उतना ही तीव्र होगा। कोल्डड्रिंक को ची तीव्रता लगभग 2.4 होती है। इसी कारण कोल्डड्रिंक पीने पर पेट व् गले में जलन, डकारे, दिमाग में सनसनी, चिड़चडा पन तथा एसिडिक हो जाती है।

ध्यान रहे की कई फलो व् सब्जियों जैसे नारंगी, निम्बू, कैरी में भी एसिड होते हैं प्राकृतिक रूप ने होने से शरीर में जाकर क्षार ने बादक जाते हैं तथा शरीर की एसिडिक कम करने का कार्य करती है। जबकि कोल्डड्रिंक में एसिड कृत्रिम रूप से होने के कारन खतरनाक बन जाता हैं। यह कोल्डड्रिंक घर में संडास साफ करने में इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोक्लोरिक एसिड की ची तीव्रता के बराबर है। अब आप सोचिये की क्या ऐसे कोल्डड्रिंक को आपको पीना चाहिये!

शरीर विज्ञान के अनुसार हर प्राणी सांस के माध्यम से हवा में विद्यमान ऑक्ससिजन (प्राण वायु) लेता है तथा शारीर में उत्पन्न कार्बन डाईऑक्साइड नामक जहरीली गैस बहार निकाल देता है। हर कोल्डड्रिंक में सीओ 2 डाली जाती है जिससे यह लंबे समय तक खराब ना हो सके। कोल्ड्रिंक पिने पे शरीर इसे नाक व मुंह के माध्यम से इसे बहार निकाल देता है। अतः ये याद रहे की यदि कभी भी गलती से भी सीओ 2 बहार न निकल पाये तो मृत्यु निश्चित है। हाल में ही सरकार ने कानून बनाया की गाडियो में सिर्फ सीसा रहित (अनलिडेड) पेट्रोल ही उपयोग किया जाये क्योंकि सीसा इंजन में जलता नही है व धुँए के साथ बहार निकल कर हवा को प्रदूषित करता है। हवा में सीसे की मात्र 0.2 पीपीएम से अधिक होने पर लोगो द्वारा इसमें सांस लेने पर यह स्नायुतंत्र, मस्तिस्क, गुर्दे, लिवर व माँसपेशियो के लिये घातक होता है। कोका कोला व पेप्सिकोला दोनों अमेरिका की कंपनी है तथा वहाँ अधिक जागरूकता के कारन बेचे जानी वाली कोल्डड्रिंक में 0.2 पीपीएम से कम सीसा डाला जाता है।

जबकि इन्ही बईमान कंपनीओ द्वारा भारत में सब चलता है की तर्ज पर कोल्डड्रिंक में 0.4 पीपीएम सीसा डाला जाता है।
कोला ब्रांड के कोल्ड्रिंक में कैफीन डाला जाता है जो अधिक माँत्र में लेने पर, बैचेनी, अनिद्रा व सर सर्द पैदा करता है। ये बहुराष्ट्रीय कंपनी अमेरिका व् यूरोप में 88 पीपीएम से कम कैफीन डालती है जबकि भारत में 111 पीपीएम तक कैफीन उपयोग करती है। जाँच करने पर कोल्डड्रिंक में कई अन्य जहरीले रसायन भी पाये गए है, आर्सेनिक, केडिमियम, जिंक,सोडियम ग्लूटामेट, पोटेशियम सोरबेट, मिथाइल बेन्जीन, ब्रोमिनेटेड, वेजिटेबल आयल इत्यादि।

विश्व स्वस्थ संगठन ने कोल्डड्रिंक को धीमा जहर घोषित किया है। गौरतलब है की एस्परटेम से बच्चों में ब्रेन हेमरेज होकर उसकी मृत्यु भी हो सकती है, इसलिये बोतल व कैन पर चेतावनी भी लिखी है की बच्चे इस्तेमाल ना करे। डॉ, के अनुसार कोल्डड्रिंक में पोस्टिक तत्त्व बिलकुल नहीं है यानि इसमें शरीर के लिये, प्रोटीन, विटामिन, वासा, खनिज, केल्शियम व फास्फोरस में से कुछ भी नहीं है।

वहीं दूसरी तरफ दूध औषधिय गुणधर्म वाला पौष्टिक, सुपाच्य व सम्पूर्ण आहार है तथा सिर्फ इसको पिलाने से बच्चे के शरीर का पूर्ण विकास होता है। लेकिन फिर भी आज के दौर मे हम कॉल्ड्रिंकस को पीने व पिलाने में हमारा स्टेटस समझने लगे है। बड़े दुर्भाग्य की बात है की हजारो वर्षों से दूध दही की नदिया की संस्कृति वाले हमारे देश में पिछले 10 वर्षो मे हमारी मानसिकता इतनी विकृत हुई है की आधुनिकता के भ्रम में लोग जहरीले रसायनों वाला कोल्डड्रिंक को गटागट जीवन जल समझकर पी ही नहीं रहे बल्कि देवता रूप अतिथि को भी पिला रहे हैं।

एक 300 एमएल कोल्डड्रिंक की बोतल को धोने में लगभग 10 लीटर पानी खर्च होता है। जिस देश में आजादी के 68 सालो बाद भी 2 लाख गाँव यानि 33 करोड़ लोगो को हर तीन में से एक व्यक्ति को पिने का पानी नसीब नहीं होता हो, उस देश में कोल्डड्रिंक पिने से बड़ा और कोई और पाप नहीं है।

पेप्सिकोला और कोकाकोला साठगांठ करके सारी कोल्डड्रिंक की एक ही कींमत रखती है। कोल्डड्रिंक में ज्यादा मुनाफा होने के कारण बिक्री बढ़ने के लिये ये कंपनी करोडों रुपये खर्च करके फिल्म सितारों व् क्रिकेट के खिलाडियांे के विज्ञापन सभी टीवी चैनल अखबार व् पत्रिका में बार बार देती है। ऐसे नए नए व सैक्सी विज्ञापन द्वारा लोगों के मस्तिस्क को पंगु बनाकर पश्चिमी जीवन शैली अपनाने को प्रोत्साहित करती है तथा मन में लालच जगाती है। दुर्भाग्य इस देश की कंगाली का रोना रोने वाली सरकार ने जहां एक और गरीब को मिलने वाले राशन के अनाज की कीमत 2 गुनी कर दी है।


अतः याद रहे की यदि देश व हमारी सेहत को बचाना है तो बहिष्कार करे, पेप्सी, लहर, 7 अप, मिरिंडा, कोक, स्प्राइट, थम्सअप, लिम्का आदि। आप सभी इसके बदले ताजे फलांे का रस पिए जैसे, फलों का रस, मिल्क शैक, नारियल पानी, निम्बू पानी, शिकंजी, दूध दही, लस्सी, जलजीरा, रसना, आदि ताकि देश के किसान को रोजगार मिल सके। आशा है की आज से ही हम सब अपनी गलती सुधारकर देश-हित व अपनी सेहत के प्रति जागरुक बनकर अपना अपना योगदान प्रदान करेंगे।

Dr. (Vaidhya) Deepak Kumar
Adarsh Ayurvedic Pharmacy
Kankhal Hardwar
Email:- aapdeepak.hdr@gmail.com
Contact: – 9897902760

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