जमीन किसी की, कब्जा किसी का, बेच डाली तीसरे ने, दो महंतों ने माल बांटकर खाया
हरिद्वार। तीर्थनगरी में अखाड़ों की सम्पत्ति को खुदबुर्द कर अपना उल्लू सीधा करने की प्रथा पुरानी है। भगवे की आड़े लेकर सम्पत्तियों पर कब्जा, विक्रय करना अमूमन हरिद्वार में आम बात हो गयी है। संतों […]









