ऋषिकेश। ऋषिकेश में धार्मिक संस्था की भूमि पर कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। षड् दर्शन साधु समाज अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षा समिति ने नगर निगम ऋषिकेश पर धार्मिक भूमि पर गैरकानूनी कब्जा और निर्माण कार्य कराने का गंभीर आरोप लगाते हुए उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को ज्ञापन सौंपा है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महन्त गोपाल गिरी के नेतृत्व में यह पत्र सौंपा गया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि खसरा संख्या 260, रकबा 11 बीघा 150 मीटर भूमि, जो ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम की संपत्ति है, उस पर नगर निगम द्वारा अवैध रूप से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। समिति का कहना है कि इस भूमि पर पूर्व में बाबा मनिराम दास बाबा काली कमली वालों द्वारा साधु-संतों और यात्रियों की सुविधा के लिए टिन शेड बनाया गया था, जिसे बाद में टाउन हॉल के रूप में उपयोग किया गया।
बताया गया कि समय-समय पर इस भवन में रेजिडेंट मजिस्ट्रेट कार्यालय, खाद्य आपूर्ति विभाग, बिजली विभाग तथा पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय भी संचालित रहे हैं। साधु समाज का दावा है कि यह भूमि पूर्ण रूप से धार्मिक प्रकृति की है और इसका उपयोग धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए होता रहा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि खसरा संख्या 261, रकबा 3 बीघा 240 मीटर भूमि नगर पालिका के पास है, जिसे मंदिर श्री भरत जी महाराज से लिया गया था। समिति के अनुसार ऋषिकुल ब्रह्मचारी आश्रम ने इस भूमि को गोस्वामी बालकों के आश्रम और गौमाताओं के बैठने के स्थान के रूप में उपयोग हेतु सुरक्षित रखा था।
साधु समाज ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी उत्तराखण्ड सरकार को गुमराह कर करोड़ों रुपये की परियोजना के नाम पर धार्मिक भूमि पर निर्माण कर रहे हैं। समिति ने दावा किया कि संबंधित भूमि का बाजार मूल्य 2 अरब 54 करोड़ 10 लाख रुपये से अधिक है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महन्त गोपाल गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्माण कार्य तत्काल नहीं रोका गया तो साधु-संत और गौरक्षक आगामी 7 जून को चारधाम छड़ी यात्रा के ऋषिकेश लौटने के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर धार्मिक संस्था की भूमि को अतिक्रमण और अवैध निर्माण से मुक्त कराया जाए। वहीं इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


