श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में उल्लासपूर्वक मनाई गई जयंती, संत सम्मेलन में संत-महंतों ने किया भगवान श्रीचंद के आदर्शों को आगे बढ़ाने का आह्वान
हरिद्वार। उदासीन संप्रदाय के आचार्य भगवान श्रीचंद महाराज की 532वीं जयंती शनिवार को श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। जयंती के अवसर पर अखाड़े में विशेष पूजा-अर्चना, संत सम्मेलन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों के संतों, महंतों और महामंडलेश्वरों ने भगवान श्रीचंद महाराज को नमन करते हुए उनके आदर्शों और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीचंद महाराज के पूजन-अर्चन से हुई। संतों ने विधिवत पूजा कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद आयोजित संत सम्मेलन में संत-महापुरुषों ने भगवान श्रीचंद महाराज के जीवन, दर्शन और मानव कल्याण के लिए उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, साधना और मानव सेवा का संदेश देता है। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व है कि भगवान श्रीचंद के विचारों और सनातन परंपरा की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत किया जा सकता है।
महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद महाराज ने आध्यात्मिक साधना के साथ लोककल्याण को भी जीवन का उद्देश्य बनाया। उनकी शिक्षाएं मनुष्य को सत्य, संयम, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि संत परंपरा की यह जिम्मेदारी है कि ऐसे महापुरुषों के संदेश को समाज तक पहुंचाया जाए।
अखाड़े के अध्यक्ष धूनी दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद महाराज की जयंती केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर है। उनके जीवन से त्याग, तपस्या और मानव सेवा की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने संत समाज से भगवान श्रीचंद के विचारों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
अखाड़े के मुखिया महंत भगत राम महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद महाराज ने समाज को आध्यात्मिक उन्नति के साथ सेवा और सद्भाव का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने जयंती समारोह में पहुंचे संत-महापुरुषों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर महंत जगतार मुनि, कोठारी नितिन दास, मुखिया महंत मंगल दास, मुखिया महंत आकाश मुनि, महंत देवानंद, महंत देवानंद, महामंडलेश्वर योगेंद्रानंद, महामंडलेश्वर राजशेखरानंद, उदासीन बड़ा अखाड़ा के महंत रामनौमी दास, कोठारी राघवेंद्र दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत, महंत और महामंडलेश्वर मौजूद रहे।
संत सम्मेलन का संचालन रविदेव शास्त्री ने किया। कार्यक्रम के दौरान संतों ने भगवान श्रीचंद महाराज के बताए मार्ग पर चलने और उनके संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
जयंती समारोह के उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में संत-महापुरुषों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।


