विधायक के वीडियो बयान से मचा हड़कंप, बीएलओ को चेतावनी
बिना जांच और सुनवाई एक भी वोट न काटें, जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट जाएंगे
विनोद धीमान
हरिद्वार। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर को लेकर खानपुर विधानसभा क्षेत्र में सियासी हलचल तेज हो गई है। स्थानीय विधायक उमेश कुमार शर्मा ने एक वीडियो बयान जारी कर आरोप लगाया है कि विधानसभा क्षेत्र में करीब 15 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कथित तैयारी की जा रही है। विधायक ने बीएलओ को राजनीतिक दबाव में काम न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि बिना जांच और सुनवाई के किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
वीडियो बयान में विधायक ने बीएलओ को संबोधित करते हुए कहा कि यदि नियमों को ताक पर रखकर मतदाताओं के नाम काटे गए तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की होगी। उन्होंने कहाकि बिना जांच और बिना सुनवाई एक भी वोट नहीं कटना चाहिए। राजनीतिक दबाव में काम न करें, जेल आप लोग जाएंगे।
एक नाम पर 27 से 32 आपत्तियां लगाने का आरोप
विधायक ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों की ओर से कथित तौर पर एक ही मतदाता के नाम पर 27 से 32 तक आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए आपत्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विधायक का कहना है कि यदि पुनरीक्षण प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो वह मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
बीएलओ से निष्पक्षता बरतने की अपील
विधायक ने बीएलओ से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य निष्पक्षता और निर्धारित नियमों के अनुसार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल आपत्ति दर्ज होने के आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। नाम हटाने से पहले नियमानुसार सत्यापन और संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।
दस्तावेजों को लेकर भी बढ़ी सक्रियता
एसआईआर के तहत मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही आवश्यक दस्तावेजों को लेकर भी लोगों में सक्रियता बढ़ी है। सत्यापन प्रक्रिया में निर्धारित दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं की नजर बनी हुई है। मतदाता सूची से नाम हटने की आशंका के चलते लोग अपने दस्तावेजों और मतदाता विवरण को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।
हालांकि, करीब 15 हजार वोट काटने की कथित साजिश और एक मतदाता के नाम पर 27 से 32 आपत्तियां दर्ज कराने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में ैप्त् प्रक्रिया के दौरान सामने आ रहे दावों और आपत्तियों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


