हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगत राम महाराज ने निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्र पुरी द्वारा हाल ही में उठाए गए मुद्दों पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि जांच की बात हो रही है तो सबसे पहले उन्हें अपनी ही जांच करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हाल ही में पंजाब से आए गणेश दास महाराज एवं उनके समर्थकों द्वारा नया उदासीन अखाड़े के महंतों पर जमीन खुर्द-बुर्द करने तथा कुंभ पर्वों में कथित रूप से नकली देवताओं को स्नान कराने जैसे आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के समर्थन में श्रीमहंत रवींद्र पुरी एवं निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने उत्तराखंड और पंजाब सरकार से मामले की जांच कराने, एक समिति गठित करने तथा गणेश दास महाराज को न्याय दिलाने की मांग की थी। उनका कहना था कि नकली देवताओं को स्नान कराना सनातन परंपरा के गौरव के विपरीत है।
इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए महंत भगत राम महाराज ने कहा कि यदि रवींद्र पुरी जांच की मांग कर रहे हैं तो सबसे पहले उन आरोपों की जांच कराएं, जो दुर्गाचार्य साध्वी कंचन गिरि द्वारा उन पर लगाए गए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि, जो पूर्व में कैलाश दास के नाम से जाने जाते थे, उनके विरुद्ध अयोध्या में संजयपति त्रिपाठी अपहरण प्रकरण में आज तक फरार आरोपित होने तथा उनके घर की कुर्की होने की बात सामने आ चुकी है। इसके अतिरिक्त दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में उनके विरुद्ध अपहरण एवं बलात्कार के प्रयास के आरोप में मुकदमा भी दर्ज है। महंत भगत राम ने सवाल उठाया कि क्या रवींद्र पुरी इन मामलों की भी जांच कराने की मांग करेंगे?
उन्होंने कहा कि गणेश दास महाराज भी बलात्कार के एक मामले में तीन वर्ष की जेल की सजा काट चुके हैं। ऐसे में यदि जांच की बात की जा रही है तो इन सभी मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
महंत भगत राम महाराज ने कहा कि दूसरे अखाड़ों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का किसी को अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले रवींद्र पुरी और स्वामी कैलाशानंद गिरि अपने घर की व्यवस्था और अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दें, उसके बाद दूसरे अखाड़ों के मामलों पर टिप्पणी करें। इसके साथ ही रविंद्र पुरी के दुलारे राज का राज भी शीघ्र ही खोला जाएगा।


