‘अमर जवान ज्योति’ कारगिल! जहाँ हमारे कितने ही वीर जवान कर्म करते हुए शहीद हुए। आज हम देश के अंदर कितनी चैन की नींद सोते हैं। ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों के बीच में हमारे फौजी हमें किस तरह से उनसे बचाते हैं, जो देश के अंदर अशांति फैलाना चाहते हैं और जिनके कारण युद्ध की परिस्थितियाँ बनती हैं। अगर इंसान समझ जाए कि उसने जन्म क्यों लिया है, और जिंदगी क्या है, तो वह अपने जीवन को सही दिशा में जी सकता है। अगर हम देखें, तो हर योनि चाहे वह जानवर की हों या जो भी अन्य प्रजातियाँ हैं, जैसे डार्विन ने कहा है, हमारा निन्यानवे प्रतिशत DNA बंदर-बंदरी से मिलता है। कभी हम बंदर-बंदरी थे और कभी फिर हम बंदर-बंदरी बन जाएँगे। बद्कर्म करने वालों को पहाड़ की योनियों में भी आना पड़ता है। हिटलर, तैमूरलंग, चंगेजखान जैसे कितने ऐसे दुनिया में लोग हुए, जिन्होंने लोगों को युद्ध के अंदर झोंक दिया और कितने शरीरों को, परमात्मा के द्वारा बनाए गए अमूल्य शरीरों का नरसंहार कर दिया। यह सब अज्ञान का खेल है, क्योंकि “है इंसान तू, हरकतें तू जानवर सी करे, तो खुदा क्या करे, ईश्वरक्या करे”। सबको यह समझना होगा।
जहाँ ‘कारगिल युद्ध स्मारक’ बनाया गया है, हम यही चाहेंगे कि वो आत्माएँ जिन्होंने देशभक्ति, राष्ट्रभक्ति के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी, उनको ईश्वर उच्च लोकों तक ले जाएँ। जैसे उनको यहाँ देश ने सम्मान दिया, मेडल दिया, वैसे ही उनको वहाँ परमात्मा का मेडल भी मिले। पड़ोसी देश ने हमें धोखा दिया और सीमा में घुसपैठ की, जिससे कारगिल युद्ध शुरू हुआ। धोखा कौन देता है? कहीं ना कहीं जिनके दिमाग में हिटलर, तैमूरलंग, चंगेजखान जैसा खून दौड़ रहा होता है, पर मर तो वो भी गए। जो बचे हैं, वो भी एक दिन मरेंगे।
परमात्मा जिसने इस शरीर को बनाया, वो शरीर के आगे ज़िंदा खड़ा होगा और फिर वो हिसाब माँगता है। फिर वहाँ सजाएँ मिलती हैं, पेड़-पहाड़, कीड़े-मकोड़े, पंछी, जानवर, सभी योनियों से उसको निकलना पड़ता है। अगर हम स्वयं को जान लें कि हम सब एक की ही संतान हैं, तो हम सृष्टि की मौज ले सकते हैं। इसलिए धरती पर हर इंसान को समझना होगा कि ये शरीर तुम्हारा नहीं है और किसी को मारने का हक तुम्हे किसी ने नहीं दिया। गर्भ से नौ महीने में सब आते हैं, पर अंत में शरीर श्मशान में मिट्टी हो जाता है और हमें कर्मों के अनुसार अगले जन्म में आना पड़ता है। पहाड़ बनकर लाखों-करोड़ों साल तक जीना पड़ता है। पर वे वीर सैनिक जो कर्मभूमि में अपने कर्म करते हैं, वो अपनी चेतना को आगे उच्च कोटि तक ले जाकर परम चेतन को उपलब्ध होते हैं।
पैंतीस सौ साल पहले कोई धर्म नहीं था। धर्म तो एक ही होता है कि स्वयं को जानना; यही कहा गौतम बुद्ध ,महावीर, जीसस, मोहम्मद,कबीर, फरीद, मीराबाई, सहजोबाई, लल्लाबाई जैसे लोगों ने, इसको हमें समझना है। जब समझ जाएँगे, तो हम सब मौज में रहेंगे और इस मनुष्य देह से अपनी यात्रा पूरी कर अपने घर पहुँचेंगे! गॉडहोम! पारब्रह्म! सचखंड! हम सब एक ही हैं। सबने यही कहा है कि परमात्मा एक है। आज श्रीराम और श्रीकृष्ण का हिन्दू बनना पड़ेगा, जीसस का क्रिश्चियन, गुरु नानक देव का सिख, महावीर स्वामी का जैन, मोहम्मद साहब का मुसलमान क्योंकि इन्होंने कभी भी अशांति और युद्ध की बात नहीं की।
‘अमर जवान ज्योति’ पर हम यही कहेंगे कि जैसे ये ज्योत है, ऐसे ही हमारे अमर सैनिक, जो कुछ लोगों के शैतानी दिमागों के कारण वीरगति को प्राप्त हुए, ईश्वर उनको और ऊँचाइयों पर रखे और सचखंड, पारब्रह्म की ओर ले जाएँ। जैसे यहाँ उनको देश ने सम्मानित किया, वहाँ पर भी वे सम्मानित हों। भारत के वीर जवान जो आज देश के चारों तरफ खड़े हैं, उनके लिए हम अंदर से प्रार्थना करते हैं कि सब कुशल मंगल रहें, सबको सद्बुद्धि मिले, सब खुशहाल रहें, मौज में रहें। जो सीमा पर ड्यूटी कर रहे हैं, उनके परिवारों को भी ईश्वर सहनशक्ति दे ताकि वो भी खुशहाल होकर जीवन को जी सकें।


