बच्चों में बढ़ती बीमारियों पर राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला, हरिद्वार के अधिवक्ताओं ने जंक फूड पर रोक की उठाई मांग

हरिद्वार। उत्तराखंड में बच्चों और युवाओं में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर हरिद्वार के चार लोगों ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग, देहरादून में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में राज्य के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) को पक्षकार बनाया गया है और जंक फूड की बिक्री व प्रचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई गई हैं।

याचिकाकर्ताओं में अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट तथा चेतन भदोरिया (एलएलबी अध्ययनरत), निवासी जगजीतपुर, हरिद्वार शामिल हैं।

याचिका में कहा गया है कि राज्य में छोटे-छोटे बच्चों में कैंसर, मोटापा, कम उम्र में डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, फैटी लीवर, दांतों की समस्याएं, पाचन संबंधी रोग तथा पोषण की कमी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बच्चों द्वारा जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को इस संदर्भ में गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

याचिका में उल्लेख किया गया है कि भारत में आर्थिक उदारीकरण के बाद 1990 के दशक से पश्चिमी शैली के फास्ट फूड जैसे बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और हॉट डॉग का प्रचलन तेजी से बढ़ा, जबकि भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थ पहले से ही उपलब्ध थे। उनका कहना है कि बच्चों को लक्षित कर जंक फूड का बढ़ता प्रचार जनस्वास्थ्य और बाल संरक्षण से जुड़ा विषय बन गया है।

याचिकाकर्ताओं ने राज्य मानवाधिकार आयोग से अनुरोध किया है कि इस मामले को जनस्वास्थ्य एवं मानवाधिकार के दृष्टिकोण से स्वीकार करते हुए राज्य सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा संबंधित विभागों से विस्तृत प्रतिवेदन तलब किया जाए।

याचिका में प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:-

राज्य में बिक रहे जंक फूड की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन।
बच्चों को लक्षित भ्रामक एवं आक्रामक जंक फूड विज्ञापनों पर प्रभावी नियंत्रण।
स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के आसपास जंक फूड की बिक्री के प्रभावी नियमन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश।
खाद्य पदार्थों पर नमक, चीनी और वसा की मात्रा को स्पष्ट एवं प्रमुख रूप से प्रदर्शित करने की व्यवस्था।
विद्यालयों में संतुलित आहार, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली पर नियमित जागरूकता अभियान।
विषय के व्यापक अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मुद्दा करोड़ों बच्चों और नागरिकों के वर्तमान एवं भविष्य के स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि जनहित एवं मानवाधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि याचिका में जंक फूड और विभिन्न बीमारियों के बीच संबंध का दावा किया गया है। किसी व्यक्ति में बीमारी के कारण अनेक हो सकते हैं और किसी विशेष बीमारी का कारण चिकित्सकीय जांच एवं वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है।

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