हनुमान मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, पंडित अधीर कौशिक बोले, देवी-देवताओं का राजनीतिक उपयोग अस्वीकार्य
हरिद्वार। लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रोड शो के दौरान भगवान हनुमान की वेशभूषा धारण किए व्यक्ति से नृत्य कराए जाने की घटना को लेकर हरिद्वार स्थित श्री अखंड परशुराम अखाड़े ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के नेतृत्व में शंकर आश्रम स्थित हनुमान मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया तथा संबंधित घटना की निंदा करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई।
पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को देवी-देवताओं की वेशभूषा का राजनीतिक कार्यक्रमों में इस प्रकार उपयोग करने या उनका उपहास उड़ाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोड शो के दौरान भगवान हनुमान की वेशभूषा धारण किए व्यक्ति के हाथ में भाजपा का झंडा देकर नृत्य कराना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण कृत्य है।
उन्होंने कहा कि जो लोग स्वयं को सनातन संस्कृति का समर्थक बताते हैं, उन्हें सबसे पहले अपने आराध्य देवी-देवताओं के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। अखाड़ा इस प्रकार की घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में हिंदूवादी संगठनों को भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि श्री अखंड परशुराम अखाड़ा लंबे समय से शोभायात्राओं और सार्वजनिक आयोजनों में देवी-देवताओं की वेशभूषा धारण कर नृत्य किए जाने का विरोध करता रहा है। उनका कहना था कि सनातन संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन श्रद्धा एवं मर्यादा के साथ होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बनाकर।
इस अवसर पर विष्णु प्रसाद शास्त्री एवं कार्तिक महाराज ने भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति पूरी दुनिया को प्रेरणा देती है और इसके सम्मान तथा संरक्षण के लिए सभी को गंभीरता से कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम में अभिमन्यु शास्त्री, विष्णु प्रसाद शास्त्री, मनोज मिश्रा, रमेश शर्मा, गोविंद उपाध्याय, हिमांशु उपाध्याय, कार्तिक महाराज, राजेंद्र प्रसाद, दिनेश सहित अनेक श्रद्धालु एवं अखाड़े के सदस्य उपस्थित रहे।


