भगवान की बाल लीलाओं का श्रवण कर मंत्रमुग्ध हुए श्रोत्रा

हरिद्वार। उपनगरी कनखल स्थित श्री यंत्र मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास महामण्डलेश्वर स्वामी नर्मदा शंकर पुरी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का समधुर वर्णन किया। इस दौरान भगवान को 56 भोग समर्पित किए गए। संगीतमय भागवत कथा में भक्तों ने भगवान की भकित् में मग्न हो सुंदर नृत्य किया।


भागवत कथा का श्रवण कराते हुए महामण्डलेश्वर आचार्य स्वमी नर्मदाशंकर पुरी महाराज ने कहाकि भगवान कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उनको मौत के घाट उतारने के लिए अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसके प्राणों का हरण कर उसको सदगति प्रदान कर देते हैं।


उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण द्वारा उनको भगवान इंद्र की पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इंद्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। जिसको देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देख भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत को नीचे बुला लेते हैं। जिससे हार कर इंद्र एक सप्ताह के बाद वर्षा को बंद कर देते हैं। जिसके बाद ब्रज में भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाने लगते हैं।

उन्होंने कहाकि भगवान की लीलाएं भक्तों को आनन्द प्रदान करती हैं और समाज को संदेश देती हैं की सत्य के मार्ग का सदैव अनुसरण करना चाहिए। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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