ग्रीष्म ऋतु में शरीर का जलीय व स्निग्ध अंश घटने लगता है। जठराग्नि व रोगप्रतिकारक क्षमता भी घटने लगती है। इससे उत्पन्न शारीरिक समस्याओं से सुरक्षा हेतु नीचे दी गयी बातों का ध्यान रखें
1:- ग्रीष्म ऋतु में जलन, गर्मी, चक्कर आना, अपच, दस्त, नेत्रविकार (आँख आना) आदि समस्याएँ अधिक होती हैं। अतः गर्मियों में घर में बाहर निकलते समय लू से बचने के लिए सिर पर कपड़ा बाँधे अथवा टोपी पहने तथा एक गिलास पानी पीकर निकलें। जिन्हें दोपहिया वाहन पर बहुत लम्बी मुसाफिरी करनी हो वे जेब में एक प्याज रख सकते हैं।
2:- उष्ण से ठंडे वातावरण में आने पर 10-15 मिनट तक पानी न पियें। धूप में से आने पर तुंरत पूरे कपड़े न निकालें, कूलर आदि के सामने भी न बैठें। रात को पंखे, एयर कंडिशनर अथवा कूलर की हवा में सोने की अपेक्षा हो सके तो छत पर अथवा खुले आँगन में सोयें। यह सम्भव न हो तो पंखे, कूलर आदि की सीधी हवा न लगे इसका ध्यान रखें।
3:- इस मौसम में दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पियें। प्रातः पानी प्रयोग (रात का रखा हुआ आधा से डेढ़ गिलास पानी सुबह सूर्योदय से पूर्व पीये ) भी पानी शरीर के जहरी पदार्थों को बाहर निकालकर त्वचा को ताजगी देने में मदद करता है।
4:- मौसमी फल या उनका रस व ठंड़ाई, नींबू की शिकंजी, पुदीने का शर्बत , गन्ने का रस, गुड का पानी आदि का सेवन लाभदायी है। गर्मियों में दही लेना मना है और दूध, मक्खन, खीर विशेष सेवनीय हैं।
5:- आहार ताजा व सुपाच्य लें। भोजन में मिर्च, तेल, गर्म मसाले आदि का उपयोग कम करें। खमीरीकृत पदार्थ, बासी व्यंजन बिल्कुल न लें। कपड़े सूती, सफेद या हल्के रंग के तथा ढीले-ढाले हों। सोते समय मच्छरदानी आदि का प्रयोग अवश्य करें।
6:- गर्मियों में फ्रीज का ठंडा पानी पीने से गले, दाँत, आमाशय व आँतो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मटके या सुराही का पानी पीना निरापद है (किंतु बिन जरूरी या प्यास से अधिक ठंडा पानी पीने से जठराग्नि मंद होती है)।
7:- इन दिनों में छाछ का सेवन निषिद्ध है। अगर लेनी ही हो तो ताजी छाछ में मिश्री, जीरा, पुदीना, धनिया मिलाकर लें।
8:- रात को देर तक जागना, सुबह देर तक सोना, अधिक व्यायाम, अधिक परिश्रम, अधिक उपवास तथा स्त्री-सहवास, ये सभी इस ऋतु में वर्जित हैं।
गर्मियों में स्वास्थ्य-सुरक्षा हेतु क्या करें ?
1:- गर्मी के कारण जिनको सिरदर्द व कमजोरी होती है वे लोग सूखा धनियां पानी में भिगा दें और घिसके माथे पर लगायें। इससे सिरदर्द और कमजोरी दूर होगी।
2:- नाक से खून गिरता हो तो हरे धनिये अथवा ताजी कोमल दूब (दूर्वा) का 2-2 बूँद रस नाक में डालें। इससे नकसीर फूटना बंद हो जायेगा।
3:- सत्तू में शीतल जल, मिश्री और थोडा घी मिलाकर घोल बनाके पियें। यह बड़ा पुष्टिा दायी प्रयोग है। भोजन थोडा कम करें।
4:- भोजन के बीच में 25-35 मि.ली. आँवले का रस पियें। ऐसा 21 दिन करें तो ह्रदय व मस्तिष्क की दुर्बलता दूर होगी।
5:- 20 मि.ली. आँवला रस, 10 ग्राम शहद, 5 ग्राम घी, सबका मिश्रण करके पियें तो बल, बुद्धि, ओज व आयु बढ़ाने में मदद मिलती है।
6:- मुँह में छाले पड गये हों तो त्रिफला चूर्ण को पानी में डाल के कुल्ले करें तथा मिश्री चूसें। इससे छाले शांत हो जायेंगे।
क्या न करें ?
1:- अति परिश्रम, अति कसरत, अति रात्रि-जागरण, अति भोजन व भारी भोजन नहीं करें। भोजन में लाल मिर्च व गर्म मसालों का प्रयोग न करें।
2:- गर्मियों में दही भूल के भी नहीं खाना चाहिए। इससे आगे चल के नस-नाड़ियों में अवरोध उत्पन्न होता है और कई बीमारियाँ होती हैं। दही खाना हो तो सीधा नहीं खायें, पहले उसे मथ के मक्खन निकाल लें और बचे हुए भाग को लस्सी या छाछ बना के मिश्री मिला के या छौंक लगा के सेवन करें। ध्यान रहे, दही खट्टा न हो।
3:- बाजारू शीतल पेयों से बचें। फ्रिज का पानी न पियें। धूप में से आकर तुरंत पानी न पियें।
मोटापा हो तो
मोटापा हो तो गर्म पानी में 1 पके बड़े नींबू का रस और शहद मिलाकर भोजन के तुरंत बाद पियें।
छाछ में तुलसी के पत्ते लेने से भी मोटापे में आराम होता है।
फोड़े-फुंसियाँ
फोड़ा-फुंसी है तो पालक गाजर ककड़ी तीनों को मिला कर उसका रस ले लें अथवा नारियल का पानी पियें तो फोड़ा फुंसी में आराम होता है।
Dr. (Vaidhya) Deepak Kumar
Adarsh Ayurvedic Pharmacy
Kankhal Hardwar
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