हरिद्वार। काफी समय से तीर्थनगरी हरिद्वार के एक गुरु जी का चेला गुरु की कारगुजारियों के चलते खासा त्रस्त है। जबकि गुरु जी पूरी तरह से चेले को अपने लपेटे में लेकर मस्त हैं। चेले के बिगड़ने पर गुरु बार-बार उसे उसके द्वारा दिए गए उपकार का प्रतिफल देने की बात कह रहा है, किन्तु चेला उसको लेने से मना कर रहा है। बताते हैं कि पूरा मामला है क्या।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीर्थनगरी के एक बाबा को कुछ समय पूर्व एक काम करवाने की एवज् में एक व्यक्ति ने मध्यस्त के माध्यम से करीब ढाई करोड़ रुपये की रकम दी। बाबा को रकम देने के बाद जिस व्यक्ति के कार्य के लिए चेले ने रकम दी थी उसके एक सप्ताह के बाद उस व्यक्ति की मौत हो गई। कुछ समय शांत रहने के बाद मध्यस्त चेले ने बाबा से रकम वापस मांगी। चेले का कहना था की जिसका काम होना था उस व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इस कारण से मेरी रकम मुझे वापस कर दें।
चेले की बात सुनकर पैसों पर मस्ती मार चुके बाबा की सांस ही अटक गई। जिसके बाद गुरु चेले को पैसा वापस करने का आश्वासन देता रहा। काफी समय बीतने के बाद जब गुरु ने चेले के पैसे वापस नहीं दिए तो चेला थोड़ा उग्र हुआ। सूत्र बताते हैं कि उसके बाद गुरु ने चेले को रुपयों की एवज में जमीन का एक भूखण्ड देने की उसे पेशकश की।
सूत्र बताते हैं कि चण्डीगढ़ के समीप रहना वाला चेला मान भी गया। चेले ने जब भूखण्ड की बावत जानकारी एकत्रित की तो पता चला की गुरु का तो उस भूखण्ड पर अधिकार ही नहीं है। ऐसे में वह मेरे नाम रजिस्ट्री कैसे कर सकता है। अब स्थिति यह है कि गुरु चेले को रुपया न देकर भूखण्ड देकर अपनी जान छुड़ाने में लगा हुआ है, जबकि चेला हकीकत जानकर किसी भी कीमत पर भूखण्ड लेने का तैयार नहीं है। चेले को अब केवल रुपये ही वापस चाहिए। अब स्थिति यह है कि गुरु रुपयों की एवज् में भूखण्ड देने की बात कह रहा तो चेला उसे लेने से इंकार कर रहा है। देखना दिलचस्प होगा की चेले को उसका रुपया वापस मिलता है या नहीं। पैसा लेने के बाद से जहां गुरु मस्ती मार रहा है वहीं चेला गुरु के कारनामों से त्रस्त है।


