हरिद्वार। जब सीएम से लेकर संतरी तक आए दिन आश्रम में माथा टेकतें हो तो एक आम अधिकारी की क्या मजाल जो आश्रम में काबिज संत के खिलाफ ऊंगली तक उठा दे। संत यदि काला करे या सफेद उसके लिए सब माफ है। नेताओं के आए दिन लगने वाले दौरों के कारण अधिकारी कार्यवाही करने की बजाय संत की चरण वंदना करते नहीं थकते।

बात यहां कनखल गांधी मार्ग स्थित जगद्गुरु आश्रम की है। जहां आश्रम का गंदा पानी वर्षों से महेश्वरानंद मार्ग पर बह रहा है। जिसकी गंदगी के कारण आम आदमी का सड़क पार करना तक दूभर होता है। यह सारी गंदगी जगद्गुरु आश्रम से निकलती है। आज तक किसी भी अधिकारी ने न तो इस गंदगी को दूर करने का प्रयास किया और न ही आश्रम पर कोई कार्यवाही की। जबकि आम आदमी द्वारा ऐसा करने पर उसे दर्जनों नोटिस थमा दिए जाते।
पूर्व में ही अधिकारियों की धींगा मस्ती के चलते जगद्गुरु आश्रम के बराबर में बने सर्वाजनिक शौचालय को रातों-रात गिरा दिया गया था। इतना ही नहीं रात में मलबा भी साफ कर दिया। अब सड़क पर अतिक्रमण कर वहां पार्क बनाया जा रहा है।
पार्षद सचिन अग्रवाल ने बताया कि जगद्गुरु आश्रम के बराबर में जो दीवार बनाई जा रही है, उसे एचआरडीए द्वारा बनवाया जा रहा है। जहां पार्क का निर्माण कराया जाएगा। जिससे लोगों को गंदगी से निजात मिलेगी। मजेदार बात यह की जिस स्थान पर पार्क के लिए दीवार बनायी जा रही है, वह सड़क का हिस्सा है। दीवार बनने से सड़क छोटी हो जाएगी। सड़क की चौड़ाई कम होने से सीजन के दौरान लोगों को समस्याओं से दो-चार होना पड़े़गा।
बता दें कि वहीं एचआरडीए सड़क पर अतिक्रमण कर पार्क का निर्माण करा रहा है, जो दूसरों को अपने घरों में निक्शे के विरूद्ध एक ईंट तक फालतू लगाने नहीं देता। यदि किसी ने नक्शे के विरूद्ध कुछ कर दिया तो फिर व्यक्ति नोटिस का जवाब देते थक जाता है, किन्तु एचआरडीए उसका पीछा नहीं छोड़ता। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे आश्रम हैं जहां आश्रम के बाहर व अंदर तक एचआरडीए द्वारा हाई मॉस्क लाईट तब लगवाई हुई हैं। जबकि प्राईवेट स्थानों पर सरकारी खर्च से कोई कार्य नहीं किया जा सकता। सड़क पर पार्क के निर्माण का क्या उद्देश्य है, यह किसी से छिपा नहीं है। केवल सौदर्यीकरण के नाम पर किसी को लाभ पहुंचाने के अतिरिक्त कुछ नहीं। जबकि जिस आश्रम को सुविधाएं मुहैय्या कराने का सरकारी नुमाईंदों द्वारा कार्य किया जा रहा है वह आश्रम विवादित है और उसका मामला न्यायालय में विचाराधीन है।


