सतीकुंड पुनरोद्धार पर बवाल, भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमाई उत्तराखंड की राजनीति
हरिद्वार। भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार के प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं श्रीगंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत वाले कार्य को 61 करोड़ रुपये में स्वीकृत कर गुजरात की एक कंपनी को सौंपा गया है। साथ ही उन्होंने मेला अधिकारी सोनिका पर परोक्ष रूप से धमकी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें डराने या गुमराह करने की कोशिश करने वालों की इतनी हैसियत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की।
प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता में अशोक त्रिपाठी ने कहा कि वह पिछले 50 वर्षों से भाजपा के सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन पार्टी में कार्यकर्ताओं की बात सुनने के लिए कोई मंच या बैठक नहीं हो रही है। ऐसे में उन्हें अपनी बात मीडिया के माध्यम से रखनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हरिद्वार को राज्य में शामिल कराने में उनकी प्रमुख भूमिका रही थी। उनका कहना था कि जिस उत्तराखंड की परिकल्पना की गई थी, आज वैसा राज्य नहीं बन पाया है और हरिद्वार की लगातार उपेक्षा हो रही है।
उन्होंने कहा कि सत्ताधीश उन पर कई आरोप लगा सकते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए बनाए जा रहे मंत्रियों की कोई विशेष मान्यता नहीं है। उन्होंने मांग की कि जिस प्रकार सरकार ने हरिद्वार भूमि घोटाले में अधिकारियों पर कार्रवाई की, उसी तरह सतीकुंड जीर्णोद्धार परियोजना की डीपीआर भी सार्वजनिक की जाए।
अशोक त्रिपाठी ने कहा कि सतीकुंड एक प्राचीन एवं पौराणिक तीर्थ है, जहां कार्तिक पूर्णिमा पर हरकी पैड़ी से भी अधिक श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे। उन्होंने कहा कि तीर्थ का पुनरोद्धार होना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि जिस कार्य की वास्तविक लागत पांच करोड़ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी, उसे 61 करोड़ रुपये में स्वीकृत किया गया।
उन्होंने बताया कि परियोजना की डीपीआर यूयूआईडीसी ने तैयार की, कार्यदायी संस्था एनबीसीसी बनाई गई और ठेका अहमदाबाद की एक कंपनी को दे दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई एजेंसी नहीं थी जो यह कार्य कर सकती थी। उन्होंने मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार पर श्जीरो टॉलरेंसश् के दावे पर भी सवाल उठाते हुए सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने का कई बार प्रयास किया, लेकिन उन्हें समय नहीं मिला। दस दिन पहले भी उन्होंने मिलने का समय मांगा था, लेकिन जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कोई पद नहीं मांगा और वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की उस सोच में विश्वास रखते हैं, जिसमें कार्यकर्ता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।
मेला अधिकारी सोनिका पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान उन्हें परोक्ष रूप से धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि वह 20 बार जेल जा चुके हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान भी जेल गए थे, इसलिए उन्हें डराने का प्रयास न किया जाए।
उन्होंने बताया कि पूरे मामले को लेकर 22 जुलाई को आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही सरकार से सतीकुंड परियोजना की लागत, ठेका प्रक्रिया और कार्यदायी संस्था के चयन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के किसी सदस्य की संलिप्तता नहीं है और प्रथम दृष्टया यह कर्मचारियों का कृत्य प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।


